अयोध्या के जीएसटी उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा मुख्यमंत्री योगी के समर्थन में लिया बड़ा कदम
अयोध्या में जीएसटी विभाग के उपायुक्त रहे प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोध में अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। इस्तीफे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वे मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक नजर आ रहे हैं।
प्रशांत कुमार सिंह ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को भेजे अपने त्यागपत्र में छह बिंदुओं के माध्यम से इस्तीफे के कारण स्पष्ट किए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा है कि वह सरकार और मुख्यमंत्री के समर्थन में तथा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोध में यह निर्णय ले रहे हैं।
इस्तीफे के पहले बिंदु में उन्होंने प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ऐसी टिप्पणियां संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ हैं और इससे वे व्यक्तिगत रूप से आहत हुए हैं। दूसरे बिंदु में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ की जा रही टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए इसे अनुचित बताया है।
तीसरे बिंदु में प्रशांत कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भोले भाले अधिकारियों को प्रलोभन देकर सरकार के खिलाफ खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं जिसे उन्होंने संविधान और लोकतंत्र के विरुद्ध साजिश बताया है। चौथे बिंदु में उन्होंने जातिवाद को बढ़ावा देने और देश तथा प्रदेश को अस्थिर करने के प्रयास का आरोप लगाया है।
पांचवें बिंदु में उन्होंने लिखा है कि वह उत्तर प्रदेश सरकार के वेतनभोगी कर्मचारी हैं और ऐसे में मुख्यमंत्री के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां उन्हें स्वीकार नहीं हैं। अंतिम बिंदु में उन्होंने खुद को एक निष्ठावान राज्य कर्मचारी बताते हुए कहा है कि त्यागपत्र स्वीकार होने तक वे नियमों के तहत पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहेंगे और राजस्व वृद्धि के लिए काम करते रहेंगे।
इस इस्तीफे को लेकर प्रशासनिक सेवा में असामान्य स्थिति मानी जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी का इस तरह सार्वजनिक रूप से भावनात्मक होकर त्यागपत्र देना चर्चा का विषय बना हुआ है। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों में आने वाले दिनों में नई बहस को जन्म दे सकता है।
