अयोध्या में कूड़ा प्रबंधन को लेकर बड़ा फैसला: बड़े संस्थानों को खुद करना होगा अपशिष्ट निस्तारण
रामनगरी अयोध्या में बढ़ते शहरी विस्तार और पर्यटन गतिविधियों के बीच कूड़ा प्रबंधन को लेकर नगर निगम ने एक अहम निर्णय लिया है। अब शहर के बड़े संस्थानों को अपने परिसर से निकलने वाले कचरे का प्रबंधन स्वयं करना होगा। इस निर्णय के तहत होटल, शॉपिंग मॉल, निजी अस्पताल, होम स्टे और बड़े रेस्टोरेंट जैसे संस्थान शामिल हैं, जिनसे प्रतिदिन एक क्विंटल या उससे अधिक कचरा उत्पन्न होता है।
बड़े संस्थानों पर नई जिम्मेदारी
नगर निगम के निर्देशानुसार, अब ऐसे सभी बड़े संस्थानों को अपने स्तर पर कूड़े का पृथक्करण और निस्तारण सुनिश्चित करना होगा। विशेष रूप से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग प्रबंधित करना अनिवार्य किया गया है। गीले कचरे से कंपोस्टिंग करने की जिम्मेदारी भी संबंधित संस्थानों को ही निभानी होगी।
इस पहल का उद्देश्य न केवल कूड़े के बोझ को कम करना है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना भी है। गीले कचरे से बनने वाली जैविक खाद का उपयोग कृषि और बागवानी में किया जा सकेगा, जिससे यह एक उपयोगी संसाधन में परिवर्तित हो जाएगा।
सूखे कचरे के लिए विकल्प और शुल्क व्यवस्था
नगर निगम ने सूखे कचरे के प्रबंधन के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यदि कोई संस्थान अपने स्तर पर सूखे कचरे का निस्तारण नहीं करना चाहता, तो वह नगर निगम द्वारा अधिकृत एजेंसियों की सेवाएं ले सकता है। हालांकि इसके लिए संस्थानों को निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा।
इस व्यवस्था से नगर निगम को अतिरिक्त संसाधन भी प्राप्त होंगे, जिनका उपयोग शहर की स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने में किया जाएगा।
30 संस्थानों को जारी हुए नोटिस
इस नई नीति के तहत नगर निगम ने 30 बड़े संस्थानों को नोटिस जारी कर दिया है। इनमें प्रमुख होटल, शॉपिंग मॉल, निजी अस्पताल और होम स्टे शामिल हैं। इन संस्थानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रतिदिन 180 मीट्रिक टन कचरा: बढ़ती चुनौती
अयोध्या में प्रतिदिन लगभग 180 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न हो रहा है। राम मंदिर निर्माण और पर्यटन के तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण शहर में बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और होम स्टे की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में शहर में 2000 से अधिक होम स्टे संचालित हो रहे हैं।
इसके साथ ही नए होटलों का निर्माण और पुराने होटलों का विस्तार भी तेजी से हो रहा है, जिससे कूड़े की मात्रा में लगातार इजाफा हो रहा है। यह स्थिति नगर निगम के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही थी।
200 मीट्रिक टन क्षमता की नई अपशिष्ट प्रबंधन इकाई
कूड़ा निस्तारण की इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए नगर निगम जल्द ही 200 मीट्रिक टन क्षमता वाली ठोस अपशिष्ट प्रबंधन इकाई शुरू करने जा रहा है। इस प्लांट के शुरू होने से शहर के कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण में मदद मिलेगी और पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होगा।
स्वच्छता अभियान को मिलेगी गति
नगर निगम का मानना है कि यदि बड़े संस्थान अपने स्तर पर कूड़ा प्रबंधन करेंगे, तो इससे नगर निगम पर पड़ने वाला बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। साथ ही स्वच्छता अभियान को भी नई गति मिलेगी।
अपर नगर आयुक्त भारत भार्गव ने बताया कि सभी संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी कर दिया गया है और उनसे सहयोग की अपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह कदम स्वच्छ भारत मिशन के तहत उठाया गया है और इससे अयोध्या को देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शामिल करने में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष
अयोध्या नगर निगम का यह निर्णय एक दूरदर्शी पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल शहर की स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। आने वाले समय में यदि इस व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो अयोध्या स्वच्छता के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
LATEST NEWS