भदोही जिला कारागार का संयुक्त निरीक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश

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Dilip Kumar
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महानिदेशक कारागार और पुलिस अधीक्षक द्वारा भदोही जिला कारागार का निरीक्षण

जनपद भदोही में कारागार व्यवस्था को और अधिक मानवीय, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम देखने को मिला। दिनांक 7 फरवरी 2026 को महानिदेशक कारागार उत्तर प्रदेश पी.सी. मीणा और पुलिस अधीक्षक भदोही अभिमन्यु मांगलिक द्वारा जिला कारागार ज्ञानपुर का संयुक्त निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण का उद्देश्य जेल परिसर में व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना और सुधार के लिए आवश्यक दिशा निर्देश देना रहा।

निरीक्षण के दौरान महानिदेशक कारागार और पुलिस अधीक्षक ने कारागार परिसर के विभिन्न हिस्सों का गहन अवलोकन किया। उन्होंने कार्यालय, बैरक, मेस, रसोईघर, स्टोर, डिस्पेंसरी और खुले परिसर की साफ सफाई का विशेष रूप से जायजा लिया। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि कारागार के अंदर स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखा जाए तथा किसी भी प्रकार की प्रतिबंधित सामग्री परिसर में प्रवेश न कर सके। इस संबंध में कारागार अधीक्षक और कर्मचारियों को स्पष्ट दिशा निर्देश दिए गए।

संयुक्त निरीक्षण के दौरान पुरुष बैरक, महिला बैरक और किशोर बैरक में जाकर वहां निरुद्ध बंदियों से भी बातचीत की गई। अधिकारियों ने सरकार द्वारा बंदियों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली और यह परखा कि भोजन, चिकित्सा, वस्त्र और अन्य मूलभूत सुविधाएं समय से और नियमानुसार उपलब्ध कराई जा रही हैं या नहीं। महानिदेशक कारागार ने निर्देश दिए कि शासन द्वारा निर्धारित सभी सुविधाएं प्रत्येक बंदी तक बिना किसी भेदभाव के समय पर पहुंचनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान रसोईघर और खाद्यान्न भंडार पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने रसोई में प्रयुक्त खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच की और वहां तैयार किए जा रहे भोजन को स्वयं चखकर उसकी पौष्टिकता और स्वाद का मूल्यांकन किया। भोजन की गुणवत्ता को और बेहतर बनाए रखने के लिए रसोई कर्मचारियों को आवश्यक सुझाव दिए गए, ताकि बंदियों को स्वास्थ्यवर्धक और संतुलित आहार मिल सके।

कारागार परिसर में संचालित डिस्पेंसरी का भी निरीक्षण किया गया। महानिदेशक और पुलिस अधीक्षक ने वहां उपलब्ध दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और उपचार व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने यह निर्देश दिया कि बंदियों के स्वास्थ्य से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए और जरूरत पड़ने पर समय से चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कैदियों की रचनात्मक गतिविधियों को भी सराहा। जिला कारागार ज्ञानपुर में बंदियों द्वारा तैयार की जा रही कालीनों को देखकर महानिदेशक कारागार ने उनकी प्रशंसा की और कहा कि इस तरह की गतिविधियां बंदियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी सहायक होती हैं। उन्होंने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि बंदियों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों को और प्रोत्साहित किया जाए।

इस अवसर पर सेंट्रल कारागार वाराणसी के अधीक्षक राधाकृष्ण मिश्र भी उपस्थित रहे। उन्होंने निरीक्षण के दौरान दी गई हिदायतों के पालन का आश्वासन दिया।

महानिदेशक कारागार ने निरीक्षण के अंत में कहा कि कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र होना चाहिए। उन्होंने भविष्य में भी व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाए रखने पर जोर दिया। यह निरीक्षण न केवल प्रशासनिक सख्ती का संकेत है, बल्कि कारागार व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, मानवीय और प्रभावी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।