काशी हिंदू विश्वविद्यालय में छात्रावास विवाद ने पकड़ा तूल
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय में छात्रावास से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है, जिसने परिसर के माहौल को एक बार फिर तनावपूर्ण बना दिया है। भगवान दास छात्रावास से जुड़े इस मामले को लेकर छात्रों ने कुलपति आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया है और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर की है। छात्रों का आरोप है कि वार्डन की कार्रवाई में निष्पक्षता नहीं बरती गई और एक निर्दोष छात्र को भी बेवजह परेशानी का सामना करना पड़ा।
निष्कासित छात्र के प्रवेश से शुरू हुआ विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब पहले से निष्कासित एक छात्र कथित तौर पर छात्रावास में भोजन करने पहुंचा। इसी दौरान वार्डन मौके पर पहुंचे और उन्होंने उस कमरे को बंद कर दिया जिसमें निष्कासित छात्र के साथ एक अन्य छात्र भी रह रहा था। बताया जा रहा है कि यह कमरा नंबर 90 है। इस कार्रवाई के बाद वहां रह रहे दूसरे छात्र को भी कमरे से बाहर कर दिया गया, जबकि उस पर किसी प्रकार का आरोप नहीं था।
निर्दोष छात्र को सजा मिलने का आरोप
छात्रों का कहना है कि शनि नाम के छात्र को पहले ही एक पुराने विवाद में दोषी मानते हुए कमरे से निष्कासित किया जा चुका था। ऐसे में जब वह दोबारा छात्रावास में पहुंचा, तो कार्रवाई उसी तक सीमित रहनी चाहिए थी। लेकिन वार्डन ने पूरे कमरे को बंद कर दिया और दूसरे छात्र को भी बाहर कर दिया गया। छात्रों ने इसे पूरी तरह अनुचित बताते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।
एक छात्र ने बताया कि वार्डन से संपर्क करने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन फोन कॉल का जवाब नहीं मिला। इस वजह से छात्रों में असंतोष और बढ़ गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते संवाद स्थापित होता, तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती।
वीसी आवास के बाहर धरना और बढ़ता आक्रोश
मामले ने तूल पकड़ा तो छात्रों ने इसे प्रशासनिक अन्याय करार देते हुए कुलपति आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों के अभिभावक की भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन यहां उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने वार्डन के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित छात्र को न्याय दिलाने की मांग उठाई है।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि जब प्राक्टोरियल बोर्ड के सदस्य मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने अपनी पहचान छिपाने के लिए मुंह ढक रखा था। इससे छात्रों के बीच अविश्वास और बढ़ गया और स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।
परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई
विरोध प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्राक्टोरियल बोर्ड की टीम तैनात की गई है। प्रशासन की ओर से लगातार छात्रों को समझाने और स्थिति को शांत करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और धरना जारी रखे हुए हैं।
प्रशासन का पक्ष अभी स्पष्ट नहीं
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, जिस तरह से छात्रों का आक्रोश बढ़ रहा है, उसे देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि मामला उच्च स्तर पर समीक्षा के लिए पहुंच सकता है।
पृष्ठभूमि और उठते सवाल
यह घटना एक बार फिर विश्वविद्यालयों में छात्रावास प्रबंधन और प्रशासनिक संवेदनशीलता को लेकर सवाल खड़े करती है। छात्र लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि छात्रावासों में नियमों का पालन करते हुए भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए। मौजूदा विवाद ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है कि क्या प्रशासनिक कार्रवाई में संवाद और पारदर्शिता को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है या नहीं।
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