बिहार में फर्जी IAS अधिकारी का भंडाफोड़, जिलाधिकारी के सामने हुआ पर्दाफाश

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छपरा, बिहार: फर्जी IAS अधिकारी को पुलिस ने पकड़ा

छपरा: बिहार के छपरा जिले से प्रशासनिक व्यवस्था को चौंकाने वाला एक बेहद दिलचस्प और गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक युवक खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी बताकर सीधे जिलाधिकारी से मिलने पहुंच गया। हैरानी की बात यह रही कि शुरुआती औपचारिकताओं के बाद वह जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंच भी गया, लेकिन बातचीत के दौरान जिलाधिकारी को उसकी बातों और व्यवहार पर संदेह हो गया।

मामला उस समय सामने आया जब छपरा के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव युवक से बातचीत कर रहे थे। युवक खुद को एक IAS अधिकारी बताते हुए अपनी पहचान का हवाला दे रहा था, लेकिन उसकी जानकारी और जवाबों में लगातार विरोधाभास दिखने लगा। जिलाधिकारी को शक हुआ तो उन्होंने बिना देर किए पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने युवक से गहन पूछताछ शुरू की।

पूछताछ में युवक ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने स्वीकार किया कि वह कोई IAS अधिकारी नहीं है, बल्कि उसने नकली IAS पहचान पत्र बनवाया था। युवक का कहना था कि उसके परिवार को कुछ लोग लगातार प्रताड़ित कर रहे थे और उसे लगा कि एक आम फरियादी के तौर पर उसकी बात नहीं सुनी जाएगी। इसी वजह से उसने नकली IAS कार्ड बनवाया और जिलाधिकारी से मिलने की कोशिश की, ताकि उसकी समस्या को गंभीरता से लिया जाए।

हालांकि यह तर्क प्रशासनिक और कानूनी नजरिए से पूरी तरह अस्वीकार्य है। सवाल यह भी उठता है कि जब वह एक आम नागरिक के रूप में शिकायत दर्ज करा सकता था, तो फिर एक संवैधानिक पद की फर्जी पहचान अपनाने की जरूरत क्यों पड़ी। यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है।

फिलहाल पुलिस युवक से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि नकली पहचान पत्र किसने और कैसे तैयार किया, और कहीं इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं है। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि फर्जी पहचान के जरिए कोई भी संवेदनशील जानकारी या गलत लाभ उठाने की कोशिश कर सकता है।

यह घटना एक ओर जहां लोगों की मजबूरी और प्रशासन तक पहुंच की कठिनाइयों को उजागर करती है, वहीं दूसरी ओर यह भी साफ करती है कि कानून हाथ में लेना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। आम नागरिकों के लिए निर्धारित शिकायत और न्याय के रास्ते मौजूद हैं, और उनका ही सहारा लेना ही सबसे सुरक्षित और वैध तरीका है।