मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के दूरदर्शी विजन और योजनाबद्ध प्रयासों के चलते बुंदेलखंड की पहचान अब केवल सूखा, गरीबी और पलायन तक सीमित नहीं रह गई है। यह क्षेत्र तेजी से महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है। डेयरी वैल्यू चेन के माध्यम से बुंदेलखंड की हजारों ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और अपने परिवार तथा समाज में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।
चित्रकूट, झांसी, ललितपुर समेत बुंदेलखंड के सात जनपदों में दुग्ध व्यवसाय आज महिलाओं की आजीविका का प्रमुख साधन बन चुका है। वर्तमान में इस क्षेत्र में 86 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं दूध उत्पादन और विपणन से जुड़कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। यह बदलाव सिर्फ आमदनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक फैसलों में स्वतंत्र रूप से भागीदारी करने लगी हैं।
बुंदेलखंड में दुग्ध व्यवसाय को संगठित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से बालिनी नामक महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी की स्थापना की गई। यह कंपनी पूरी तरह महिला दुग्ध उत्पादकों द्वारा संचालित है, जिससे पारंपरिक बिचौलिया व्यवस्था समाप्त हो गई है। अब महिलाओं को उनके दूध का उचित और तय मूल्य सीधे प्राप्त होता है, जिससे उनकी बाजार पर निर्भरता कम हुई है और आय में स्थायित्व आया है। बालिनी कंपनी ने यह साबित कर दिया है कि यदि महिलाओं को सही मंच और संसाधन मिलें तो वे सफल उद्यमी बन सकती हैं।
डेयरी वैल्यू चेन परियोजना का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में यह पहल बुंदेलखंड के 952 गांवों तक पहुंच चुकी है, जिससे दुग्ध उत्पादन से जुड़े लाभ सीधे ग्रामीण स्तर तक पहुंच रहे हैं। इस परियोजना के अंतर्गत 3,600 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 86,000 महिलाओं को एक संगठित नेटवर्क से जोड़ा गया है। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं और आधुनिक डेयरी प्रबंधन की जानकारी हासिल कर रही हैं।
तकनीक के उपयोग ने इस व्यवस्था को और मजबूत बनाया है। दूध संग्रह से लेकर गुणवत्ता परीक्षण तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से संचालित की जा रही है। प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता की जांच होने से उपभोक्ताओं का भरोसा भी बढ़ा है। इसके साथ ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने महिलाओं को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है। बैंक खातों में सीधे पैसा पहुंचने से न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि गांवों में डिजिटल साक्षरता और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
योगी सरकार की नीतियों का मूल उद्देश्य ग्रामीण विकास की धुरी महिलाओं को बनाना है। डेयरी वैल्यू चेन और बालिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी इस सोच का सशक्त उदाहरण हैं। यह पहल अब केवल एक व्यावसायिक मॉडल नहीं रही, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव का माध्यम बन चुकी है। इससे जुड़ी महिलाएं अब आत्मनिर्भर हैं, सम्मान के साथ जीवन जी रही हैं और अपने बच्चों की शिक्षा तथा परिवार के भविष्य को बेहतर दिशा दे पा रही हैं।
बुंदेलखंड में यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि जब योजनाएं जमीनी जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू की जाती हैं, तो उनके परिणाम दूरगामी होते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही यह डेयरी पहल आज बुंदेलखंड की महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है और क्षेत्र की तरक्की की सबसे मजबूत कड़ी बन चुकी है।
