चंदौली: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद, BNS में एक साल के भीतर आया कड़ा फैसला

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POCSO न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

चंदौली: नाबालिग से दुष्कर्म के एक अत्यंत संवेदनशील और समाज को झकझोर देने वाले मामले में न्याय की विजय दर्ज हुई है। POCSO न्यायालय ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि मासूमों के साथ अपराध करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं है। सदर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम विसउरी से जुड़े इस मामले में अदालत का फैसला न सिर्फ पीड़िता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सख्त चेतावनी भी है।

विशेष शासकीय अधिवक्ता (POCSO) शमशेर बहादुर सिंह के अनुसार, ग्राम विसउरी निवासी सुभाष सोनकर पर 14 मार्च 2025 की रात अपनी नाबालिग पड़ोसी के साथ दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप था। घटना के बाद पीड़िता के परिजनों ने साहस दिखाते हुए थाना सदर चंदौली में मुकदमा दर्ज कराया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए वैज्ञानिक व कानूनी प्रक्रिया के तहत साक्ष्य संकलन किया और समयबद्ध विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।

मामले की सुनवाई POCSO कोर्ट में माननीय न्यायाधीश अनुराग मिश्रा की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाण प्रस्तुत किए। न्यायालय ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद अभियुक्त सुभाष सोनकर को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा के साथ 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया, जिससे पीड़िता को न्याय के साथ-साथ सामाजिक भरोसा भी मिला।

इस फैसले की खास बात यह रही कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत चंदौली जनपद का यह पहला ऐसा मामला है, जिसमें मुकदमा दर्ज होने के मात्र एक वर्ष के भीतर दोषी को सजा सुनाई गई। इसे त्वरित और प्रभावी न्यायिक प्रक्रिया का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। विशेष शासकीय अधिवक्ता ने इस उपलब्धि के लिए पुलिस अधीक्षक और विवेचना में शामिल पूरी पुलिस टीम की भूमिका की सराहना की, जिन्होंने बिना किसी ढिलाई के मामले को अंजाम तक पहुंचाया।

यह फैसला न केवल पीड़िता और उसके परिवार के लिए न्याय की जीत है, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास को भी मजबूत करता है। नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर सख्त रुख अपनाते हुए अदालत ने यह साबित कर दिया है कि न्याय व्यवस्था सतर्क है और अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। चंदौली का यह निर्णय आने वाले समय में ऐसे मामलों में एक मजबूत नजीर बनेगा और न्याय की अविस्मरणीय मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।