यूपी कैबिनेट की बड़ी बैठक: शिक्षा और विकास पर ऐतिहासिक फैसले

3 Min Read
यूपी कैबिनेट ने 30 प्रस्तावों पर मुहर लगाई; शिक्षाकर्मियों को कैशलेस इलाज और गोरखपुर को सीवरेज परियोजना की मंजूरी।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक के बाद जारी प्रेस ब्रीफिंग में सरकार ने कई अहम निर्णयों की जानकारी दी। बैठक में कुल 30 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी विकास से जुड़े फैसले प्रमुख रहे। इन निर्णयों को राज्य के लाखों कर्मचारियों और आम जनता के लिए राहत और विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद ने व्यापक सहमति जताते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों, अनुदानित एवं स्ववित्तपोषित संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस फैसले के तहत बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन कार्यरत 4 लाख 34 हजार 226 शिक्षक, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों के 13 हजार 380 शिक्षक, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के 4 लाख 72 हजार 735 शिक्षक, 1 लाख 42 हजार 929 शिक्षामित्र, उच्च प्राथमिक विद्यालयों के 24 हजार 717 अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कार्यरत 7 हजार 479 वार्डन व अंशकालिक और पूर्णकालिक शिक्षक, पीएम पोषण योजना के 97 हजार 344 रसोइए तथा 2 हजार 581 विशेष शिक्षक शामिल हैं। इसके साथ ही इन सभी के आश्रित परिवारजनों को भी इस सुविधा का लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर 11 लाख 95 हजार 391 शिक्षाकर्मियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिस पर सरकार का कुल व्यय ₹358.61 करोड़ होगा।

माध्यमिक शिक्षा विभाग से संबंधित एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में मंत्रिपरिषद ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों और स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। इस निर्णय को शिक्षा जगत में लंबे समय से उठ रही मांग के अनुरूप माना जा रहा है, जिससे माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत आधार मिलेगा।

शहरी विकास के क्षेत्र में गोरखपुर के लिए भी बड़ी सौगात की घोषणा की गई। अटल नवीकरण एवं शहरी रूपांतरण मिशन 2.0 (अमृत 2.0) के अंतर्गत गोरखपुर नगर निगम क्षेत्र में सीवरेज योजना के ज़ोन A3 से संबंधित परियोजना को मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिली है। इस परियोजना पर ₹721 करोड़ 40 लाख 41 हजार की लागत आएगी। सरकार के अनुसार, इस योजना के क्रियान्वयन से गोरखपुर शहर की सीवरेज व्यवस्था में बड़ा सुधार होगा और स्वच्छता व जनस्वास्थ्य को मजबूती मिलेगी।

कुल मिलाकर, यूपी कैबिनेट के इन फैसलों को शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने, शिक्षाकर्मियों को सामाजिक सुरक्षा देने और शहरी आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस और दूरगामी कदम के रूप में देखा जा रहा है।