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वाराणसी: काशी में पहली बार लगा जनता दरबार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुनीं समस्याएं

वाराणसी: काशी में पहली बार लगा जनता दरबार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुनीं समस्याएं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में पहली बार जनता दर्शन आयोजित कर लोगों की समस्याएं सुनीं और न्याय का आश्वासन दिया।

वाराणसी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को काशी में जनता दर्शन कर एक नई परंपरा की शुरुआत की। आमतौर पर गोरखपुर और लखनऊ में जनता से रूबरू होने वाले मुख्यमंत्री पहली बार गोरखपुर और राजधानी से बाहर वाराणसी के सर्किट हाउस में लोगों की समस्याएं सुनने पहुंचे। सुबह आठ बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में करीब 50 लोग अपनी शिकायतों और आवेदन पत्रों के साथ उपस्थित हुए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन को लेकर स्थानीय प्रशासन ने पहले से ही पूरी तैयारी कर रखी थी। सर्किट हाउस में 100 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन सुबह सवा सात बजे तक ही हॉल पूरी तरह भर चुका था। इसके बाद बाहर खड़े लोगों से अधिकारी उनके आवेदन पत्र लेकर आश्वस्त करते रहे कि हर एक पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि, कुछ लोग अंदर जाने की जिद करते रहे, मगर अफसर उन्हें समझाते रहे कि सभी समस्याओं पर मुख्यमंत्री के स्तर से ही विचार होगा।

जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न वर्गों से आए लोगों से मुलाकात की और उनकी बात ध्यान से सुनी। सबसे संवेदनशील क्षण उस समय आया जब सनबीम स्कूल के दिवंगत शिक्षक प्रवीण झा की पत्नी ने मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई। योगी आदित्यनाथ ने उनकी बात गंभीरता से सुनते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया। सीएम का यह आश्वासन पीड़ित परिवार के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के वाराणसी दौरे पर आमतौर पर शहर के जनप्रतिनिधियों और चुनिंदा 30-35 प्रमुख नागरिकों से मुलाकात होती है, जो बंद कमरे में आयोजित बैठकों तक सीमित रहती है। लेकिन इस बार व्यवस्था कुछ अलग रही। राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि काशी के आम नागरिकों से सीधे मुलाकात के उद्देश्य से जनता दर्शन की व्यवस्था की गई है, ताकि लोग अपनी समस्याएं बिना किसी माध्यम के मुख्यमंत्री तक पहुंचा सकें।

जनता दर्शन के इस मिनी संस्करण को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई लोगों ने इसे जनसंपर्क का एक सकारात्मक प्रयोग बताया। उनका कहना था कि इससे जनता को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि अगर इस पहल को नियमित रूप से वाराणसी में भी जारी रखा गया, तो इससे जनता और सरकार के बीच की दूरी और कम होगी।

काशी में हुआ यह पहला जनता दर्शन न सिर्फ राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि मुख्यमंत्री राज्य के हर हिस्से के लोगों की बात सीधे सुनने के लिए तैयार हैं। वाराणसी में आयोजित यह कार्यक्रम भविष्य में अन्य जिलों में भी जनता दर्शन की संभावनाओं को मजबूत करता है।

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