सीटेट परीक्षा में यूपी के पांच जिलों में सॉल्वर पकड़े गए, पुलिस कर रही जांच

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Pradyumn Kant Patel
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सीटेट परीक्षा के दौरान यूपी के पांच जिलों में पकड़े गए सॉल्वर, पुलिस जांच में जुटी

केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा सीटेट के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश के कई जिलों में परीक्षा की शुचिता पर बड़ा प्रहार सामने आया, जब दूसरे के स्थान पर परीक्षा दे रहे पांच सॉल्वर पकड़े गए। रविवार को हुई कार्रवाई में वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ और प्रयागराज में पुलिस और परीक्षा केंद्र प्रशासन की सतर्कता से इन मामलों का खुलासा हुआ। सभी आरोपियों को मौके पर हिरासत में लेकर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

वाराणसी में सुभाषचंद्र महाविद्यालय स्थित परीक्षा केंद्र पर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां आजमगढ़ निवासी अर्चना यादव अपनी जेठानी मंजू देवी के स्थान पर परीक्षा दे रही थी। बायोमेट्रिक सत्यापन और दस्तावेज जांच के दौरान संदेह होने पर केंद्र प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद अर्चना यादव को मौके पर ही पकड़ लिया गया। पूछताछ में रिश्तेदारी और फर्जी तरीके से परीक्षा देने की बात सामने आई।

मऊ जिले के अमृत पब्लिक स्कूल सहादतपुरा परीक्षा केंद्र पर प्रथम पाली के दौरान एक और सॉल्वर पकड़ा गया। यहां बलिया निवासी सुशील कुमार वर्मा, बलिया के ही परीक्षार्थी सोना सम्राट मौर्या के स्थान पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर परीक्षा दे रहा था। जांच के दौरान पहचान में गड़बड़ी मिलने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

जौनपुर के प्रकाश ग्लोबल परीक्षा केंद्र पर प्रतापगढ़ की रहने वाली कुमारी गौतम को पकड़ा गया। वह जौनपुर निवासी नीलम यादव के स्थान पर परीक्षा दे रही थी। दस्तावेजों में फोटो और हस्ताक्षर के मिलान में अंतर मिलने पर केंद्र प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की।

गाजीपुर के न्यू शाह फैज पब्लिक स्कूल में भी सॉल्वर का मामला सामने आया। यहां पटना निवासी अंकित कुमार सिंह, परीक्षार्थी जीत यादव के स्थान पर परीक्षा दे रहा था। पुलिस ने उसे मौके से गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया।

इसी तरह प्रयागराज जनपद के प्रतापगढ़ क्षेत्र में पं. नागेश दत्त पब्लिक स्कूल अझारा में कौशांबी निवासी संजय कुमार को पकड़ा गया। वह अपने मित्र प्रतापगढ़ निवासी उमेश कुमार के स्थान पर परीक्षा दे रहा था। दोनों की दोस्ती के चलते यह फर्जीवाड़ा किया गया था।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं और इस तरह की हरकतों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। इन घटनाओं के बाद परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और कड़ी कर दी गई है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी को रोका जा सके।