प्रतापगढ़ जेल में विचाराधीन बंदी की इलाज के दौरान मौत, परिजनों में शोक

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Pradyumn Kant Patel
Pradyumn Kant Patel is the Editorial Staff Manager at News Report, a registered Hindi newspaper. He oversees newsroom operations, editorial workflows, and content quality standards, ensuring...
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प्रतापगढ़ जिला कारागार, जहां विचाराधीन बंदी की इलाज के दौरान मौत हुई

प्रतापगढ़ जिला कारागार से शुक्रवार को एक दुखद खबर सामने आई, जहां मारपीट के एक मामले में विचाराधीन बंदी के रूप में निरुद्ध एक कैदी की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान शुकुलपुर थाना अंतू निवासी 41 वर्षीय विनोद कुमार शुक्ला के रूप में हुई है, जो वर्ष 2023 से जिला कारागार में बंद था। घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया, वहीं परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की सुबह करीब 9 बजे विनोद कुमार शुक्ला को अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। बैरक में मौजूद अन्य बंदियों ने इसकी सूचना तत्काल जेल प्रशासन को दी। सूचना मिलते ही जेल के चिकित्सकीय स्टाफ ने प्राथमिक जांच की और स्थिति को गंभीर देखते हुए बिना देरी किए उसे जिला मुख्यालय स्थित राजा प्रताप बहादुर अस्पताल भेजा गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया, लेकिन दोपहर के समय इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

जेल अधीक्षक ऋषभ द्विवेदी ने बताया कि विनोद कुमार शुक्ला लंबे समय से जेल में निरुद्ध था और मारपीट के एक आपराधिक मामले में विचाराधीन बंदी के रूप में सजा काट रहा था। उन्होंने बताया कि कैदी की तबीयत बिगड़ने पर नियमानुसार तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई और अस्पताल भेजा गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। मौत की सूचना मिलने के बाद परिजनों को तत्काल अवगत करा दिया गया है।

जेल प्रशासन के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण हार्ट से जुड़ी समस्या माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की विधिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जेल प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले में सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।

इस घटना के बाद जिला कारागार में सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जेल में निरुद्ध बंदियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच और समय पर इलाज बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि जेल में बंद सभी कैदियों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए।

विनोद कुमार शुक्ला की मौत की खबर जैसे ही उसके गांव शुकुलपुर पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोग अस्पताल और जेल प्रशासन से संपर्क में हैं और आगे की औपचारिकताओं का इंतजार कर रहे हैं।

फिलहाल, पुलिस और जेल प्रशासन पूरे मामले की निगरानी कर रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों पर स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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