रामनगर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर विचार गोष्ठी
वाराणसी: रामनगर क्षेत्र के वार्ड नंबर 65 पुराना रामनगर में आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम नगर पालिका परिषद रामनगर की पूर्व अध्यक्ष सुश्री आशा गुप्ता के आवास पर आयोजित हुआ। इस दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, उनके विचारों और राष्ट्र निर्माण को लेकर उनके चिंतन को याद किया। गोष्ठी में विशेष रूप से अंत्योदय की अवधारणा, समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान और राष्ट्र प्रथम की भावना को लेकर विचार मंथन किया गया।
अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति तभी मानी जा सकती है जब विकास की प्रक्रिया का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। विशेष रूप से उन लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पीछे हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन में अंत्योदय को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। अंत्योदय का आशय समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और कल्याण की पहुंच सुनिश्चित करने से जुड़ा है। वक्ताओं ने कहा कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना विकास की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
एकात्म मानववाद के विचार पर हुई चर्चा
विचार गोष्ठी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद से जुड़े विचारों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि उनका चिंतन केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं था। उन्होंने व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के बीच संबंधों को व्यापक दृष्टि से देखने का प्रयास किया। उनके विचारों में आर्थिक विकास के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक पक्षों को भी महत्व दिया गया। इसी संदर्भ में कार्यक्रम में कहा गया कि विकास का उद्देश्य केवल संसाधनों में वृद्धि करना नहीं बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक सुधार लाना भी होना चाहिए।
राष्ट्र प्रथम की भावना पर मंथन
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र प्रथम की भावना को लेकर भी वक्ताओं ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण किसी एक व्यक्ति या वर्ग की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन को राष्ट्रसेवा, संगठन और समाज के प्रति समर्पण से जोड़ते हुए उपस्थित लोगों ने उनके विचारों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया। गोष्ठी में सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता, जनकल्याण और जरूरतमंद लोगों की चिंता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
25 सितंबर को मनाई जाती है जयंती
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को हुआ था। उनकी जयंती प्रत्येक वर्ष 25 सितंबर को मनाई जाती है। वे भारतीय जनसंघ के प्रमुख नेताओं और संगठनकर्ताओं में शामिल रहे। उनके राजनीतिक और दार्शनिक चिंतन में एकात्म मानववाद का विशेष स्थान रहा। भारतीय जनसंघ के संगठन को मजबूत करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके विचारों में भारतीय परिस्थितियों और परंपराओं के अनुरूप विकास तथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र की समग्र प्रगति से जोड़ने पर जोर दिया गया।
समाज के प्रति जिम्मेदारी पर जोर
रामनगर में आयोजित विचार गोष्ठी में उपस्थित लोगों ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती केवल उनके जीवन को स्मरण करने का अवसर नहीं बल्कि उनके विचारों को समझने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों पर विचार करने का अवसर भी है। अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सहायता और विकास का लाभ पहुंचाने की भावना को सामाजिक दायित्व से जोड़ते हुए वक्ताओं ने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ना समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों की मौजूदगी
कार्यक्रम में स्थानीय स्तर पर संगठन और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। उपस्थित कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन से प्रेरणा लेने तथा राष्ट्र और समाज के हित में अपनी भूमिका निभाने की बात कही। आयोजन के दौरान उनके विचारों और राष्ट्र सेवा की भावना को लेकर चर्चा होती रही।
इस अवसर पर डॉ अनुपम गुप्ता, श्री अशोक जायसवाल, पार्षद श्री लल्लन सोनकर, श्री जितेन्द्र पांडेय झुनझुन, श्री रितेश पाल, श्री राजकुमार सिंह, श्री विनोद सिंह पटेल, श्रीमती कंचन निषाद, श्री परमेंद मिश्रा, श्री भैयालाल सोनकर सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उनके विचारों को स्मरण किया और समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को लेकर विचार रखे।
अंत्योदय और जनकल्याण को बताया महत्वपूर्ण संदेश
कार्यक्रम का मुख्य संदेश समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और कल्याण की पहुंच सुनिश्चित करने की भावना से जुड़ा रहा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और एकात्म मानववाद से संबंधित विचारों को याद करते हुए उपस्थित लोगों ने सामाजिक जिम्मेदारी, जनकल्याण और राष्ट्र प्रथम की भावना को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। रामनगर के पुराना क्षेत्र में आयोजित यह विचार गोष्ठी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और चिंतन को स्मरण करने के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति नागरिक जिम्मेदारी पर विचार करने का अवसर बनी।
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