IRRI-ISARC के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह: Sub1 धान से दक्षिण एशिया में जलवायु-स्मार्ट खेती तक

By
Savan Nayak
मेरा नाम सावन कुमार है, और मैं न्यूज रिपोर्ट में वरिष्ठ क्राइम संवाददाता के रूप में कार्यरत हूँ। पत्रकारिता के प्रति मेरी गहरी रुचि है, और...
3 Min Read
IRRI-ISARC वाराणसी के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह—Sub1 धान और दक्षिण एशिया में टिकाऊ कृषि पहल

कृषि विज्ञान के क्षेत्र में लगभग तीन दशकों के अनुभव के साथ डॉ. सुधांशु सिंह आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले कृषि वैज्ञानिक हैं। वह वर्तमान में International Rice Research Institute South Asia Regional Centre (ISARC) वाराणसी के निदेशक हैं और दक्षिण एशिया में संस्थान के अनुसंधान, संचालन और रणनीतिक विकास का नेतृत्व कर रहे हैं।

डॉ. सुधांशु सिंह ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित Acharya Narendra Deva University of Agriculture and Technology से कृषि विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री स्वर्ण पदक के साथ प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने राजस्थान स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन के माध्यम से अधिकारी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की, जहां उनका फोकस कृषि विस्तार और बीज प्रणाली पर रहा। शोध के प्रति गहरी रुचि ने उन्हें आगे अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।

उन्होंने फिलीपींस स्थित International Rice Research Institute के मुख्यालय में पीएचडी की पढ़ाई पूरी की। उनका शोध कार्य बाढ़ सहनशील Sub1 धान किस्म पर केंद्रित रहा, जिसे जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रही कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2011 में वे IRRI में पोस्टडॉक्टोरल फेलो के रूप में जुड़े और इसके बाद दक्षिण एशिया में कई प्रमुख परियोजनाओं का नेतृत्व किया।

IRRI के साथ अपने कार्यकाल में डॉ. सिंह ने बिहार में BMGF वित्तपोषित IRRAS परियोजना, असम में वर्ल्ड बैंक समर्थित APART परियोजना, EC IFAD द्वारा वित्तपोषित एबायोटिक स्ट्रेस प्रबंधन परियोजनाएं तथा USAID और BMGF समर्थित CSISA परियोजना में अहम भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त STRASA जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।

ISARC के निदेशक के रूप में डॉ. सुधांशु सिंह न केवल अनुसंधान बल्कि नीति निर्माण, साझेदारी और संस्थागत विकास की दिशा भी तय कर रहे हैं। वे ISARC की तीन प्रमुख इकाइयों सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन राइस वैल्यू एडिशन, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन सस्टेनेबल एग्रीकल्चर और सेंटर ऑफ एजुकेशन इनोवेशन एंड रिसर्च फॉर डेवलपमेंट को रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। उनका उद्देश्य शोध को खेत तक पहुंचाना और दक्षिण दक्षिण सहयोग को मजबूत करना है।

उनके योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता मिली है। उन्हें उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर वे क्रॉप एंड वीड साइंस सोसायटी के फैलो नामित किए गए और विभिन्न वैज्ञानिक मंचों पर नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें एमिनेंट साइंटिस्ट अवॉर्ड, लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और भारतीय एग्रोनोमी सोसाइटी के फैलो अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

डॉ. सुधांशु सिंह का कार्य कृषि अनुसंधान को जलवायु अनुकूल बनाने, किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में ठोस प्रभाव डाल रहा है। भारत ही नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में उनके प्रयास कृषि विकास की नई दिशा तय कर रहे हैं।

मेरा नाम सावन कुमार है, और मैं न्यूज रिपोर्ट में वरिष्ठ क्राइम संवाददाता के रूप में कार्यरत हूँ। पत्रकारिता के प्रति मेरी गहरी रुचि है, और मैं हमेशा निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने का प्रयास करता हूँ। समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर करना और जनता की आवाज़ को सही मंच तक पहुँचाना मेरा उद्देश्य है।