इटावा में करीब 50 लाख रुपये मूल्य के कोडीनयुक्त कफ सीरप की बड़ी खेप पकड़े जाने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस प्रकरण में बिहार की समस्तीपुर जनपद स्थित डिवाइन इंटरप्राइजेज फर्म के मालिक Rahul Kumar के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल एक खेप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार एक संगठित अंतरराज्यीय नशा सप्लाई नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को इटावा में 400 पेटी कोडीनयुक्त विस्कोप कफ सीरप बरामद की गई थी, जिसकी बाजार कीमत करीब 50 लाख रुपये आंकी गई है। इस मामले में पहले ही मौके से तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब जांच आगे बढ़ने पर सामने आया है कि इस अवैध खेप के पीछे बिहार के समस्तीपुर जिले के उजियारपुर बेलामेघ गांव निवासी राहुल कुमार की अहम भूमिका है। राहुल, गिरफ्तार आरोपित विकास कुमार का भाई बताया जा रहा है और वही डिवाइन इंटरप्राइजेज फर्म का रजिस्टर्ड मालिक है।
पुलिस ने राहुल कुमार के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 22 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। धारा 21 नशीले पदार्थ के परिवहन से जुड़ी है, जबकि धारा 22 निर्धारित मात्रा से अधिक नशीला पदार्थ रखने से संबंधित है। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपित फर्म की आड़ में इस कफ सीरप को बिहार भेजा जा रहा था, जहां शराबबंदी के चलते इसका इस्तेमाल नशे के विकल्प के रूप में किया जा रहा था।
थाना प्रभारी Amit Mishra ने बताया कि बिहार में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध होने के कारण कोडीनयुक्त कफ सीरप की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी का फायदा उठाकर आरोपी इस सीरप की अवैध सप्लाई कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब समस्तीपुर स्थित डिवाइन इंटरप्राइजेज के रजिस्टर्ड मालिक राहुल कुमार के खिलाफ भी विधिक कार्रवाई कर दी गई है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी देहरादून की Bindlas Biotech कंपनी से कानूनी कागजात और ई वे बिल के माध्यम से कफ सीरप की खरीद करते थे। कागजों में यह सप्लाई वैध दर्शाई जाती थी, लेकिन असल उद्देश्य इसे बिहार में अवैध नशे के लिए बेचने का था। पुलिस के अनुसार यह तरीका लंबे समय से अपनाया जा रहा था, ताकि शक न हो और जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब कंटेनर चालक Sandeep Yadav को रास्ते में कंटेनर में संदिग्ध गतिविधियां नजर आईं। शक होने पर चालक कंटेनर को लेकर इटावा पहुंचा और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कार सवार तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया। इनमें बिहार के समस्तीपुर जिले के उजियारपुर क्षेत्र के बेलामेघ गांव निवासी विकास कुमार, वैशाली जनपद के सधेई बुजुर्ग क्षेत्र के रामपुर गांव निवासी सोनू कुमार और उजियारपुर क्षेत्र के सलेमपुर गांव निवासी अरुण राय शामिल हैं।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर देहरादून और समस्तीपुर पुलिस से औपचारिक रिपोर्ट तलब की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय है और इसमें और कौन कौन लोग शामिल हैं। साथ ही जिला औषधि विभाग को भी इस मामले की जानकारी देकर सहयोग मांगा गया है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि संबंधित कंपनियां और फर्म पहले भी इस तरह की अवैध सप्लाई में शामिल रही हैं या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य जिलों या राज्यों से जुड़े तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित एजेंसियों को भी शामिल किया जाएगा। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता इस अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क को पूरी तरह उजागर कर उसके हर सदस्य पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की है।
