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गंगा में नावों के पंजीयन पर 21 माह का प्रतिबंध हटा, परिवहन विभाग संभालेगा जिम्मेदारी

गंगा में नावों के पंजीयन पर 21 माह का प्रतिबंध हटा, परिवहन विभाग संभालेगा जिम्मेदारी

गंगा में 21 माह बाद नावों के पंजीयन पर रोक हटी, अब परिवहन विभाग संभालेगा जिम्मेदारी और फिटनेस जांच भी अनिवार्य।

गंगा नदी में चल रही नावों के पंजीयन और नवीकरण पर लगी रोक इक्कीस महीने बाद समाप्त हो गई है। शासन के ताजा निर्णय के तहत अब नावों के पंजीयन की जिम्मेदारी परिवहन विभाग को सौंप दी गई है। इसके साथ ही मैरिटाइम बोर्ड की तर्ज पर क्रूज डबल डेकर और मोटर बोट का फिटनेस परीक्षण भी अनिवार्य कर दिया गया है। सर्वेयर द्वारा फिटनेस रिपोर्ट दिए जाने के बाद ही परिवहन विभाग पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इस फैसले को गंगा में बढ़ते हादसों और अव्यवस्थित नौका संचालन पर नियंत्रण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

गंगा में किसी भी प्रकार की दुर्घटना की स्थिति में अब एनडीआरएफ के साथ जल पुलिस संयुक्त रूप से बचाव कार्य करेगी। हालांकि नाव संचालन को लेकर स्पष्ट बायलाज अभी तक लागू नहीं हुआ है। शासन स्तर पर इस विषय पर मंथन जारी है और बायलाज आने के बाद ही संचालन व्यवस्था रूट निर्धारण और अन्य व्यावहारिक समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा। इससे पहले नाव संचालन को लेकर नियमों की कमी पर लगातार सवाल उठते रहे हैं और विभिन्न माध्यमों से इस विषय को प्रमुखता से उठाया गया था।

जल परिवहन और जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शासन और प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यटन विकास से जुड़े कई कार्यक्रम और योजनाएं लागू की जा रही हैं लेकिन इसके समानांतर पर्यटकों की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजामों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। गंगा में मनमाने ढंग से नावों के संचालन के कारण आए दिन छोटी बड़ी घटनाएं सामने आ रही थीं जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे थे।

नगर निगम ने मार्च दो हजार चौबीस से नावों का पंजीयन बंद कर दिया था और नवीकरण की प्रक्रिया भी रोक दी गई थी। इस दौरान गंगा में चलने वाली नावों की संख्या करीब ग्यारह सौ पचास से बढ़कर लगभग दो हजार तक पहुंच गई। इसके साथ ही किसी प्रकार का रूट निर्धारण न होने से नावों के आपस में टकराने की घटनाएं भी बढ़ने लगी थीं। जल पुलिस ने कई बार इन हालातों पर चिंता जताई थी लेकिन अधिकार न होने के कारण कार्रवाई संभव नहीं हो पा रही थी।

नगर निगम द्वारा पंजीयन प्रक्रिया से दूरी बनाए जाने के बाद यह स्पष्ट नहीं रह गया था कि नावों का पंजीयन कौन करेगा। परिवहन विभाग को जिम्मेदारी सौंपे जाने की बात तो हुई लेकिन औपचारिक आदेश न मिलने से वे भी आगे नहीं बढ़ सके। इस बीच मामले को शासन ने संज्ञान में लिया और तत्काल परिवहन विभाग को नावों के पंजीयन का आदेश जारी कर दिया गया।

आदेश मिलते ही सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन मनोज वर्मा ने Dashashwamedh Ghat पर नाविकों के साथ बैठक की और उन्हें पंजीयन की प्रक्रिया तथा आवश्यक औपचारिकताओं की जानकारी दी। इसके साथ ही Ganga River में नावों के पंजीयन की प्रक्रिया दोबारा शुरू हो गई है। इससे न केवल जल परिवहन व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है बल्कि पर्यटकों और नाविकों दोनों की सुरक्षा को लेकर भी भरोसा बढ़ा है।

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