कानपुर कोडीन सीरप तस्करी केस: SIT की कार्रवाई पर उठे सवाल, इनामी आरोपी शिवम अग्रवाल की गिरफ्तारी पर विवाद
41 लाख से ज्यादा नशीली सीरप की सप्लाई, 12 राज्यों में फैला नेटवर्क
कानपुर। कोडीनयुक्त कफ सीरप की अवैध तस्करी से जुड़े बड़े मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेष जांच दल (SIT) द्वारा गिरोह के सरगना विनोद अग्रवाल के बेटे शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार किए जाने के दावे और इनाम घोषित करने की प्रक्रिया में विरोधाभास सामने आने से पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है।
यह मामला सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत देश के 12 राज्यों में फैले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के माध्यम से 41 लाख से अधिक कोडीनयुक्त कफ सीरप की शीशियों की अवैध आपूर्ति दिखाई गई थी।
गिरफ्तारी से पहले इनाम घोषित करने पर सवाल
जानकारी के अनुसार, गिरोह के सरगना विनोद अग्रवाल के बेटे शिवम अग्रवाल पर पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। हालांकि सूत्रों का दावा है कि SIT ने शिवम को उसी दिन प्रयागराज से गिरफ्तार कर लिया था, जिस दिन उस पर इनाम घोषित किया गया।
इस घटनाक्रम ने पुलिस की पारदर्शिता और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर SIT गिरफ्तारी का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों के बयान में विरोधाभास देखने को मिल रहा है।
डीसीपी क्राइम एवं SIT प्रभारी श्रवण कुमार सिंह ने कहा कि शिवम को अभी पकड़ा नहीं गया है और पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है। वहीं, दूसरी ओर सूत्रों के अनुसार उसे पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है।
सरगना समेत कई आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल
इस मामले में SIT अब तक कई आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इनमें गिरोह का सरगना विनोद अग्रवाल और उसके सहयोगी प्रभात खरे शामिल हैं। इसके अलावा विशाल सिंह सिसोदिया, रोहन पचौरी और सुमित केसरवानी को भी विभिन्न मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है।
वहीं, कुछ अन्य आरोपी अब भी फरार हैं, जिनमें वेद प्रकाश शिवहरे, शिवम अग्रवाल, अनमोल गुप्ता, मंजू शर्मा, अभिषेक शर्मा और विकास तिवारी के नाम शामिल हैं।
फर्जी फर्मों के जरिए चल रहा था बड़ा खेल
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने देशभर में 200 से अधिक फर्मों के माध्यम से कोडीनयुक्त कफ सीरप और अन्य नशीली दवाओं की बिक्री दिखाई थी। हालांकि SIT की जांच में आधे से अधिक फर्में फर्जी पाई गई हैं।
यह पूरा नेटवर्क औषधि व्यवसाय की आड़ में संचालित किया जा रहा था, जहां वैध दवा वितरण के नाम पर नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई की जा रही थी।
भारी मात्रा में बरामद हुई थी नशीली दवाएं
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) द्वारा पिछले वर्ष की गई छापेमारी में एक लाख से अधिक कोडीनयुक्त कफ सीरप की शीशियां बरामद की गई थीं। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 20 लाख शीशियां पहले ही बाजार में बेची जा चुकी थीं।
पुलिस अब तक करीब 11.50 लाख शीशियों को बरामद कर चुकी है, जबकि शेष की तलाश जारी है।
5.50 करोड़ की संपत्ति भी हुई फ्रीज
जांच एजेंसियों ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए सरगना विनोद अग्रवाल, उसके बेटे शिवम और पत्नी की करीब 5.50 करोड़ रुपये की संपत्ति को भी फ्रीज कर दिया है।
यह कार्रवाई अवैध कमाई और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं को ध्यान में रखते हुए की गई है।
कई थानों में दर्ज हैं मुकदमे
इस मामले में कानपुर के विभिन्न थानों में कुल आठ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें महाराजपुर, रायपुरवा, कल्याणपुर, चकेरी, कलक्टरगंज और हनुमंत विहार थाना शामिल हैं।
जिन फर्मों के खिलाफ कार्रवाई हुई है उनमें मां दुर्गा मेडिकोज, बालाजी मेडिकोज, एएस हेल्थ केयर, आरएस हेल्थ केयर, मसाइको फर्म, मेडिसिन फार्मा और अग्रवाल ब्रदर्स जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
कैसे चलता था तस्करी का नेटवर्क
SIT की जांच में सामने आया है कि गिरोह का सरगना विनोद अग्रवाल अपनी फर्म ‘अग्रवाल ब्रदर्स’ के माध्यम से अन्य फर्मों को कोडीनयुक्त कफ सीरप और नशीली दवाएं सप्लाई करता था। इसके बाद ये फर्में आगे छोटे डीलरों और अन्य नेटवर्क के जरिए इन दवाओं को विभिन्न राज्यों में पहुंचाती थीं।
इस तरह यह नेटवर्क धीरे-धीरे देश के कई राज्यों में फैल गया और एक संगठित तस्करी गिरोह का रूप ले लिया।
जांच में और खुलासों की उम्मीद
पुलिस और SIT की टीम अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
हालांकि, गिरफ्तारी और इनाम घोषित करने की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने इस पूरे ऑपरेशन की विश्वसनीयता पर असर डाला है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे की जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं और पुलिस अपनी कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कैसे देती है।
फिलहाल यह मामला उत्तर प्रदेश में नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ चल रही कार्रवाई का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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