कानपुर के बहुचर्चित कुशाग्र हत्याकांड में आखिरकार इंसाफ की घड़ी नजदीक आ गई है। हाईस्कूल छात्र कुशाग्र कनोडिया के अपहरण और निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने पूर्व ट्यूशन टीचर रचिता वत्स उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और उनके साथी शिवा गुप्ता को दोषी करार दे दिया है। इस जघन्य अपराध की सजा अब 22 जनवरी को सुनाई जाएगी। अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार के साथ साथ पूरे शहर में गहरी भावनाएं देखने को मिलीं। कुशाग्र की मां ने कोर्ट में फूट फूट कर रोते हुए दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की और कहा कि तभी उनके बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी।
आचार्य नगर निवासी कपड़ा कारोबारी मनीष कनोडिया के बेटे कुशाग्र की हत्या ने अक्टूबर 2023 में पूरे कानपुर को झकझोर दिया था। अपर जिला जज 11 सुभाष सिंह की अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद तीनों आरोपितों को दोषी ठहराते हुए कहा कि यह फैसला भविष्य में एक नजीर बनेगा और कानून के विद्यार्थियों को इस मामले का अध्ययन करना चाहिए। न्यायालय की इन टिप्पणियों को सुनकर अदालत कक्ष में मौजूद लोग भावुक हो गए। कुशाग्र की मां अपने बेटे को याद कर बेसुध हो गईं और उन्होंने कठोरतम सजा की मांग दोहराई।
कुशाग्र कनोडिया जैपुरिया स्कूल का हाईस्कूल छात्र था। 30 अक्टूबर 2023 को वह रोज की तरह कोचिंग के लिए घर से निकला था लेकिन वापस नहीं लौटा। उसी शाम उसके घर पर एक युवक स्कूटर से एक पत्र पहुंचाकर गया जिसमें 30 लाख रुपये की फिरौती की मांग की गई थी। पुलिस ने तत्काल मामले की जांच शुरू की तो स्कूटर फजलगंज के खोयामंडी निवासी पूर्व ट्यूशन टीचर रचिता वत्स का निकला। पूछताछ के दौरान वह घबरा गई और बताया कि स्कूटर उसका प्रेमी प्रभात शुक्ला ले गया था। इसके बाद पुलिस 31 अक्टूबर को दर्शनपुरवा स्थित प्रभात के घर पहुंची जहां एक कोठरी से कुशाग्र का शव बरामद हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि इस अपराध में दर्शनपुरवा निवासी शिवा गुप्ता ने भी मदद की थी।
पुलिस की कड़ी पूछताछ में खुलासा हुआ कि रचिता और प्रभात शादी कर फिरौती की रकम से अपना घर बसाना चाहते थे। कुशाग्र उन्हें पहचानता था इसलिए अपहरण के बाद उसे कोठरी में ले जाकर गला घोंटकर हत्या कर दी गई और फिरौती वसूलने की कोशिश की गई। इस मामले में कारोबारी मनीष कनोडिया के चाचा संजय कनोडिया ने रायपुरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन की ओर से कुल 14 गवाह पेश किए गए जिनमें मृतक के घर के सदस्य भी शामिल थे। 13 जनवरी को अंतिम बहस पूरी हुई और मंगलवार को अदालत ने तीनों को दोषी करार दे दिया।
फैसले के दिन कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कुशाग्र की हत्या के बाद से ही लोगों में भारी आक्रोश था और एलआईयू को आशंका थी कि जनाक्रोश कोर्ट के बाहर देखने को मिल सकता है। इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स के जवानों को तैनात किया गया था। तीनों अभियुक्तों को सुबह कड़ी सुरक्षा में जेल से कोर्ट लाया गया और फैसले के बाद भीड़ को हटाकर वापस जेल भेजा गया। जिला शासकीय अधिवक्ता दिलीप अवस्थी और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता भास्कर मिश्र ने बताया कि सजा के बिंदु पर अभियोजन पक्ष की ओर से फांसी की मांग की जाएगी। अब पूरे शहर की नजरें 22 जनवरी पर टिकी हैं जब अदालत इस सनसनीखेज हत्याकांड में सजा का ऐलान करेगी।
