लखनऊ विकास प्राधिकरण के अवर अभियंता सहित तीन लोग सात लाख पचास हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार
लखनऊ: भ्रष्टाचार के खिलाफ उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। सतर्कता अधिष्ठान लखनऊ की टीम ने शनिवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण के अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा, एलडीए के सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश तथा एक निजी व्यक्ति श्रवण कुमार को सात लाख पचास हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई गोमती नगर स्थित लखनऊ विकास प्राधिकरण परिसर के निकट की गई। सतर्कता अधिष्ठान के अनुसार तीनों आरोपियों को शिकायत के सत्यापन और पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद ट्रैप कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किया गया।
बिल्डर से निर्माण कार्य के नाम पर मांगी गई थी रिश्वत
सतर्कता अधिष्ठान की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान लखनऊ सेक्टर से शिकायत की थी कि लखनऊ विकास प्राधिकरण में तैनात अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा उसके निर्माणाधीन भवन पर पहुंचे और निर्माण कार्य बंद कराने की बात कही। शिकायतकर्ता के अनुसार बाद में उसके कर्मचारी के माध्यम से बताया गया कि आईजीआरएस पोर्टल पर निर्माण को लेकर शिकायत की गई है और इस मामले का निस्तारण कराने के लिए श्रवण कुमार से संपर्क करना होगा।
शिकायतकर्ता के अनुसार श्रवण कुमार ने उसे राम मनोहर लोहिया अस्पताल के गेट पर बुलाकर बताया कि उसकी अवर अभियंता से बात हो चुकी है। यदि वह पंद्रह लाख रुपये दे देता है तो उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसके बाद शिकायतकर्ता एलडीए कार्यालय पहुंचा जहां अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा और सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश से मुलाकात हुई। आरोप है कि वहां भी पंद्रह लाख रुपये की रिश्वत की मांग दोहराई गई और आगे की बातचीत सुपरवाइजर के माध्यम से करने को कहा गया।
दो किस्तों में रिश्वत देने की बनी सहमति
प्रेस नोट के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोपियों से कहा कि उसके पास तत्काल इतनी बड़ी राशि उपलब्ध नहीं है। इसके बाद सात लाख पचास हजार रुपये की दो किस्तों में भुगतान करने की बात तय हुई। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था और उसने पूरे मामले की शिकायत सतर्कता अधिष्ठान से कर दी। इसके बाद सतर्कता अधिष्ठान ने शिकायत की गोपनीय जांच शुरू की।
गोपनीय जांच में शिकायत सही मिलने पर बिछाया गया जाल
सतर्कता अधिष्ठान की जांच में प्रथम दृष्टया शिकायत सही पाई गई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और निजी व्यक्ति श्रवण कुमार आपस में मिलीभगत कर आईजीआरएस पोर्टल से जुड़े मामले का लाभ उठाते हुए शिकायतकर्ता से रिश्वत मांग रहे थे। जांच एजेंसी ने निगरानी और अन्य तकनीकी साक्ष्य भी एकत्र किए। शिकायत की पुष्टि होने के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई।
सात लाख पचास हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तारी
शनिवार एक अगस्त दो हजार छब्बीस को सतर्कता अधिष्ठान की टीम ने शिकायतकर्ता के माध्यम से तय राशि दिलवाई। इसी दौरान सात लाख पचास हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार करते समय अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और निजी व्यक्ति श्रवण कुमार को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। टीम ने मौके से रिश्वत की पूरी राशि भी बरामद कर ली।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
सतर्कता अधिष्ठान के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में लखनऊ विकास प्राधिकरण के अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा, एलडीए के सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश तथा निजी व्यक्ति श्रवण कुमार शामिल हैं। प्रेस नोट के अनुसार बरामद रिश्वत की राशि सात लाख पचास हजार रुपये है।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई जारी रहने का दावा
उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान ने कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। यदि कोई राजपत्रित, अराजपत्रित अथवा अन्य लोकसेवक सरकारी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है तो उसकी शिकायत सतर्कता अधिष्ठान की रिश्वत विरोधी हेल्पलाइन पर की जा सकती है। शिकायत मिलने पर नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाती है।
पृष्ठभूमि
लखनऊ विकास प्राधिकरण में निर्माण कार्यों और भवन संबंधी अनुमतियों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आईजीआरएस और अन्य ऑनलाइन शिकायत प्रणालियां संचालित हैं। ऐसे मामलों में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा अवैध धन की मांग करना भ्रष्टाचार निवारण कानून के अंतर्गत गंभीर अपराध माना जाता है। फिलहाल इस मामले में सतर्कता अधिष्ठान द्वारा आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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