मेरठ में फेक न्यूज पर नजर रखने के लिए पुलिस का गोपनीय अभियान, 20 हजार फर्जी सोशल मीडिया आईडी तैयार करने की योजना
मेरठ जनपद में सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं पर नियंत्रण के लिए पुलिस एक बड़े और गोपनीय अभियान पर काम कर रही है। इस योजना के तहत करीब पांच हजार पुलिसकर्मियों को शामिल करते हुए फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लगभग 20 हजार फर्जी आईडी तैयार करने की रणनीति बनाई गई है। इसका उद्देश्य सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर नजर रखना, उनका समय रहते खंडन करना और माहौल बिगाड़ने की कोशिशों को नाकाम करना बताया जा रहा है।
हर पुलिसकर्मी बनाएगा चार फर्जी आईडी
सूत्रों के अनुसार, जनपद के प्रत्येक पुलिसकर्मी को चार-चार फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह कुल मिलाकर करीब 20 हजार आईडी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सक्रिय की जाएंगी। इन आईडी का इस्तेमाल आम नागरिक बनकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गतिविधियों पर नजर रखने और संदिग्ध पोस्ट या टिप्पणियों की पहचान करने के लिए किया जाएगा।
फेक न्यूज का तत्काल खंडन करने की तैयारी
इस अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी है कि यदि सोशल मीडिया पर कोई भ्रामक या झूठी खबर वायरल होती है, तो इन फर्जी आईडी के माध्यम से तुरंत उसका खंडन किया जा सके। पुलिसकर्मी आम यूजर की तरह प्रतिक्रिया देते हुए सही जानकारी साझा करेंगे, जिससे अफवाहों को फैलने से रोका जा सके।
गलत टिप्पणी करने वालों पर भी रहेगी नजर
इस योजना के तहत केवल फेक न्यूज पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ या आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वालों पर भी नजर रखी जाएगी। पुलिस इन फर्जी आईडी के जरिए ऐसे लोगों की पहचान कर सकेगी और समय रहते उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। इससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
गोपनीय तरीके से चलाया जा रहा ऑपरेशन
पूरे अभियान को बेहद गोपनीय तरीके से संचालित किया जा रहा है। हालांकि पुलिस के उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी होने की बात सामने आ रही है, लेकिन आधिकारिक रूप से इस पर ज्यादा खुलासा नहीं किया गया है। इसे एक रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे सोशल मीडिया पर सक्रिय असामाजिक तत्वों पर नियंत्रण पाया जा सके।
वायरल ऑडियो के बाद बढ़ी सख्ती
बताया जा रहा है कि हाल ही में सीओ ब्रह्मपुरी का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिससे पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर पुलिस के खिलाफ कई तरह की टिप्पणियां की गई थीं। माना जा रहा है कि इसी पृष्ठभूमि में पुलिस ने यह रणनीति तैयार की है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
साइबर सेल की भूमिका और आधिकारिक प्रतिक्रिया
साइबर सेल प्रभारी का कहना है कि सभी पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना चाहिए, क्योंकि कई अहम सूचनाएं यहीं से मिलती हैं। इससे समय रहते कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में सहायता मिलती है। वहीं, एसएसपी अविनाश पांडेय ने इस प्रकार की किसी भी योजना की जानकारी से अनभिज्ञता जताई है, जिससे इस अभियान की गोपनीयता और भी स्पष्ट होती है।
निष्कर्ष
मेरठ पुलिस का यह कदम आधुनिक डिजिटल दौर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक नया प्रयोग माना जा रहा है। हालांकि इस तरह की रणनीति को लेकर गोपनीयता और पारदर्शिता के बीच संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती होगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह पहल फेक न्यूज और सोशल मीडिया अपराधों पर कितना प्रभाव डाल पाती है।
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