मीरजापुर: ‘भौंकने वाले बच्चे’ का मामला निकला मानसिक विकार, रेबीज की आशंका गलत साबित
मीरजापुर। जिले में कुत्ते के काटने के बाद एक बच्चे के भौंकने का वीडियो वायरल होने से जहां लोगों में दहशत फैल गई थी, वहीं अब चिकित्सकीय जांच में यह मामला पूरी तरह से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा पाया गया है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि बच्चे को रेबीज नहीं, बल्कि डिसोसिएटिव कन्वर्जन डिसऑर्डर (आईसीडी F44) है।
जांच में नहीं मिला रेबीज का कोई लक्षण
डॉक्टरों द्वारा किए गए परीक्षण में यह पाया गया कि बच्चे में रेबीज के सामान्य लक्षण मौजूद नहीं थे। वह केवल भौंकने और घबराहट जैसी स्थिति में था, जबकि अन्य व्यवहार सामान्य था। वायरल वीडियो में भी बच्चा सामान्य रूप से पानी पीता दिखाई दिया, जो रेबीज के लक्षणों से मेल नहीं खाता।
प्रारंभिक उपचार के बाद बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वह घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहा है। फिलहाल उसमें भौंकने जैसी कोई समस्या नहीं देखी जा रही है।
बीएचयू के विशेषज्ञों ने किया स्पष्ट
बीएचयू के चिकित्सकों और डॉ. शेफाली बत्रा द्वारा किए गए मूल्यांकन में पुष्टि हुई कि यह मामला डिसोसिएटिव कन्वर्जन डिसऑर्डर का है। यह एक मानसिक स्थिति है, जिसमें किसी आघात, डर या तनाव के कारण व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव आ जाता है।
विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि मनुष्य रेबीज के कारण भौंकने नहीं लगते, जिससे सोशल मीडिया पर फैली भ्रांतियों का खंडन हुआ है।
कुत्ते के काटने के बाद अधूरी रह गई थी वैक्सीन
कछवां क्षेत्र के जोगीपुर वार्ड निवासी भाईलाल के 13 वर्षीय पुत्र करन को करीब पांच महीने पहले वाराणसी के हरहुआ में कुत्ते ने काट लिया था। उस समय उसे एंटी-रेबीज टीका लगाया गया था, लेकिन बाद में उसने डर के कारण टीके की पूरी खुराक नहीं ली।
14 मार्च को उसकी तबीयत बिगड़ी और वह असामान्य व्यवहार करने लगा। पहले उसे कछवां सीएचसी ले जाया गया, जहां से उसे मीरजापुर मंडलीय अस्पताल और फिर बीएचयू वाराणसी रेफर किया गया।
कई अस्पतालों के बाद मिला आराम
बीएचयू और अन्य अस्पतालों में उपचार के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। बाद में हरहुआ के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक इंजेक्शन दिए जाने के बाद बच्चे की हालत में सुधार हुआ। अब वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा है, हालांकि हल्के चक्कर की शिकायत बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर फैली अफवाहें
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की गलत जानकारियां फैलने लगीं, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि बिना पुष्टि के ऐसी खबरें फैलाना खतरनाक हो सकता है, खासकर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए। कई बार शारीरिक लक्षणों के पीछे मानसिक कारण होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।
करन के पिता भाईलाल ने बताया कि उनका बेटा अब बेहतर है और उन्होंने लोगों से अपील की कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहें और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश
यह घटना एक सीख देती है कि हर असामान्य व्यवहार को केवल शारीरिक बीमारी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सही जानकारी और समय पर उपचार से ऐसी समस्याओं का समाधान संभव है।
करन की कहानी यह दर्शाती है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है और समाज में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
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