उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक बेहद दुखद और चिंताजनक मामला सामने आया है जहां बिजली विभाग की कथित लापरवाही के कारण एक संविदा लाइनमैन की करंट लगने से मौत हो गई। यह हादसा बुधवार सुबह उस समय हुआ जब लाइनमैन खेत में खराब पड़ी विद्युत लाइन को ठीक करने का कार्य कर रहा था। इस घटना ने एक बार फिर संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था और विभागीय जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतक लाइनमैन की पहचान फुगाना गांव निवासी दीपक के रूप में हुई है। दीपक फुगाना स्थित बिजलीघर पर संविदा लाइनमैन के पद पर तैनात था और रोजाना की तरह बुधवार सुबह भी उसे खेत में खराब हुई बिजली लाइन को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। परिजनों और सहकर्मियों के अनुसार दीपक ने कार्य शुरू करने से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी की थीं और नियमानुसार शटडाउन भी लिया था ताकि लाइन में करंट न रहे और काम सुरक्षित तरीके से किया जा सके।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दीपक खंभे पर चढ़कर लाइन सुधारने का काम कर रहा था तभी अचानक विद्युत लाइन में करंट दौड़ गया। तेज करंट लगने से उसे जोरदार झटका लगा और वह संतुलन खोकर खंभे से नीचे गिर पड़ा। घटना के बाद आसपास मौजूद ग्रामीण और उसके साथी तुरंत मौके पर पहुंचे और गंभीर हालत में दीपक को शामली जिला अस्पताल ले जाया गया। हालांकि अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस हादसे की सूचना मिलते ही मृतक के घर में कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों का रो रो कर बुरा हाल है। दीपक घर का मुख्य कमाने वाला था और उसकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शटडाउन के बावजूद लाइन में करंट आया तो यह सीधे तौर पर बिजली विभाग की भारी लापरवाही को दर्शाता है। लोगों का आरोप है कि विभाग की लापरवाही के कारण पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन हर बार मामले को दबा दिया जाता है।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि इतने गंभीर हादसे के बावजूद बिजली विभाग का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी न तो घटनास्थल पर पहुंचा और न ही पीड़ित परिवार से मिलने की जरूरत समझी। इस संवेदनहीन रवैये को लेकर ग्रामीणों और मृतक के परिजनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि संविदा कर्मचारियों से जोखिम भरा काम कराया जाता है लेकिन उनकी सुरक्षा और बीमा जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विभाग ध्यान नहीं देता।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि शटडाउन के बाद भी लाइन में करंट कैसे आया। साथ ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि जब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होगी तब तक इस तरह की घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। इस हादसे ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर संविदा कर्मचारियों की जान की कीमत क्या है और उनकी सुरक्षा को लेकर विभाग कितनी गंभीरता दिखा रहा है।
