केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस बार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों की सूची में कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा और जनजीवन से जुड़े कुल 131 विशिष्ट व्यक्तित्वों को शामिल किया गया है। इन पुरस्कारों में पांच पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री सम्मानों को मंजूरी दी गई है। इसी सूची में भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता Dharmendra का नाम भी शामिल है, जिन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित करने का एलान किया गया है।
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली के अनुसार, धर्मेंद्र को यह सम्मान भारतीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान और लंबे, प्रभावशाली करियर के लिए दिया जा रहा है। उन्होंने छह दशक से अधिक समय तक फिल्म उद्योग को अपनी कला से समृद्ध किया और इस दौरान 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। उनका नाम उन चुनिंदा कलाकारों में शुमार है, जिन्होंने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की, बल्कि अभिनय की सादगी, संवाद अदायगी और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।
धर्मेंद्र ने अपने करियर की शुरुआत 1960 के दशक में की थी और जल्द ही वह हिंदी सिनेमा के सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय अभिनेताओं में शामिल हो गए। रोमांटिक भूमिकाओं से लेकर एक्शन और गंभीर किरदारों तक, उन्होंने हर शैली में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके अभिनय में सहजता और भावनात्मक गहराई ने उन्हें आम दर्शकों से लेकर फिल्म समीक्षकों तक का चहेता बना दिया। उन्होंने कई ऐसी फिल्में दीं, जो आज भी भारतीय सिनेमा की क्लासिक कृतियों में गिनी जाती हैं।
पद्म पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों के बीच भावुक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा को धर्मेंद्र के सिनेमा के प्रति समर्पण और उनकी विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का प्रतीक है, बल्कि उस दौर की हिंदी फिल्मों की भी याद दिलाता है, जिसने भारतीय सिनेमा को एक मजबूत पहचान दी सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पद्म पुरस्कार उन लोगों को दिए जाते हैं, जिन्होंने अपने क्षेत्र में असाधारण और विशिष्ट सेवा प्रदान की हो। धर्मेंद्र का नाम इस सूची में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि उनका योगदान समय से परे है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उनके अभिनय, लोकप्रियता और सिनेमा पर पड़े प्रभाव को देखते हुए यह सम्मान भारतीय फिल्म इतिहास में एक अहम अध्याय के रूप में याद रखा जाएगा।
