उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद में रविवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। लीलापुर थाना क्षेत्र के घरौरा गांव में पुराने कुएं की खुदाई और ईंटें निकालने के दौरान अचानक बलुई मिट्टी धंसक गई, जिससे काम कर रहे चार श्रमिक मलबे के नीचे दब गए। इस हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद गांव में अफरा तफरी का माहौल बन गया और मौके पर चीख पुकार मच गई।
घटना घरौरा गांव निवासी मो. शमशाद के घर के सामने स्थित पुराने ट्यूबवेल वाले कुएं पर हुई। यह कुआं काफी समय से उपयोग में नहीं था और उसे पाटने की तैयारी चल रही थी। इसी क्रम में कुएं की ईंटें निकाली जा रही थीं ताकि बाद में उसमें मिट्टी भरकर उसे पूरी तरह बंद किया जा सके। रविवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे मजदूर कुएं में उतरकर ईंटें निकाल रहे थे। कुछ देर तक काम सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन दोपहर लगभग दो बजे अचानक कुएं की दीवार की बलुई मिट्टी में दरार आ गई और देखते ही देखते मिट्टी और ईंटें भरभराकर नीचे गिर पड़ीं।
हादसे के वक्त कुएं के अंदर चार मजदूर मौजूद थे। इनमें सरोज पुत्र श्यामलाल, उनका छोटा भाई 24 वर्षीय धीरज सरोज, 17 वर्षीय आकाश सरोज पुत्र संजय सरोज और 30 वर्षीय पिंटू सरोज पुत्र राजेंद्र कुमार सरोज शामिल थे। अचानक हुए इस हादसे में चारों मजदूर मलबे और ईंटों के नीचे दब गए। तेज आवाज और मजदूरों की चीख पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुंचे और तुरंत पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही Uttar Pradesh Police की टीम लीलापुर थाने से मौके पर पहुंची। हालात की गंभीरता को देखते हुए बुलडोजर मंगवाकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। कुछ ही देर में दमकल विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई और संयुक्त रूप से राहत और बचाव कार्य तेज किया गया। कड़ी मशक्कत के बाद सभी दबे मजदूरों को मलबे से बाहर निकाला गया।
घायलों की हालत गंभीर होने के कारण तीन मजदूरों को तत्काल राजा प्रताप बहादुर अस्पताल प्रतापगढ़ भेजा गया, जबकि आकाश सरोज को ट्रामा सेंटर लालगंज में भर्ती कराया गया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने दीपक सरोज को मृत घोषित कर दिया। मजदूर की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। अन्य घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है और उनकी स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
घटना की जानकारी मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। एसडीएम शैलेंद्र वर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही राहत और बचाव कार्य शुरू करा दिया गया था। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद दी जाएगी और मामले की जांच भी कराई जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
इस हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बिना सुरक्षा इंतजाम के किए जा रहे ऐसे कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुराने कुओं और ट्यूबवेल को पाटने के दौरान मिट्टी धंसकने का खतरा बना रहता है, लेकिन इसके बावजूद अक्सर मजदूरों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर दिया जाता है। घरौरा गांव की यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बन गई, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक चेतावनी भी है कि ऐसे कार्यों में सतर्कता और सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है।
