प्रयागराज में यूपी बोर्ड की फर्जी वेबसाइट बनाने वाला गिरोह बेनकाब: दो गिरफ्तार, बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद
प्रयागराज साइबर क्राइम पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की फर्जी वेबसाइट बनाकर छात्रों और अभिभावकों को ठगने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सत्येंद्र बर्नवाल और उसके सहयोगी मोनू गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से बड़ी संख्या में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
गिरफ्तार आरोपी और उनका ठिकाना
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी सत्येंद्र बर्नवाल मूल रूप से बिहार के गोपालगंज का रहने वाला है, जबकि वर्तमान में वह गाजियाबाद में रह रहा था। वहीं उसका सहयोगी मोनू गुप्ता लखनऊ का निवासी है। दोनों लंबे समय से इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े हुए थे और छात्रों को निशाना बना रहे थे।
बरामदगी: फर्जी प्रमाण पत्रों का बड़ा जखीरा
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 24 फर्जी अंकपत्र, डिप्लोमा और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद किए हैं। इसके अलावा चार फर्जी मुहरें, दो लैपटॉप और तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज तैयार करने और ऑनलाइन ठगी को अंजाम देने में किया जा रहा था।
फर्जी वेबसाइट बनाकर की जाती थी ठगी
जांच में सामने आया है कि गिरोह ने यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती एक कूटरचित वेबसाइट तैयार की थी। इस वेबसाइट के माध्यम से छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित कर उनसे पैसे वसूले जाते थे।
बीते वर्ष यूपी बोर्ड की ओर से साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि कुछ असामाजिक तत्व आधिकारिक वेबसाइट www.upmsp.edu.in की नकल बनाकर ठगी की साजिश रच रहे हैं। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की।
सरगना पहले ही हो चुका था गिरफ्तार
इस मामले में इससे पहले आजमगढ़ निवासी गिरोह के सरगना और कॉल सेंटर संचालक शशि प्रकाश राय तथा उसके रिश्तेदार मनीष को गिरफ्तार किया जा चुका है। ये दोनों करीब पांच-पांच हजार रुपये में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बेचते थे।
पूछताछ में शशि प्रकाश राय ने खुलासा किया था कि फर्जी वेबसाइट बनाने का काम सत्येंद्र बर्नवाल ने किया था। इसके बाद साइबर क्राइम थाना प्रभारी ओम नारायण गौतम की टीम ने कार्रवाई करते हुए सत्येंद्र और मोनू गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया।
ठगी का तरीका: ऑन डिमांड फर्जी डिग्री
एसीपी राजकुमार मीना के अनुसार सत्येंद्र बर्नवाल तकनीकी रूप से फर्जी वेबसाइट तैयार करता था, जबकि मोनू गुप्ता छात्रों से संपर्क कर उनसे पैसे लेकर फर्जी मार्कशीट, डिग्री, डिप्लोमा और माइग्रेशन प्रमाण पत्र उपलब्ध कराता था। यह पूरा काम ऑन डिमांड किया जाता था, जिससे गिरोह को मोटा मुनाफा होता था।
अपराधिक धाराएं और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है।
पुलिस टीम और जांच की दिशा
इस पूरे ऑपरेशन को साइबर क्राइम थाना प्रभारी ओम नारायण गौतम के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कितनी रकम की ठगी की गई।
जनता के लिए सलाह
पुलिस ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी शैक्षणिक जानकारी या दस्तावेज के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट और मान्यता प्राप्त माध्यमों का ही उपयोग करें। किसी भी संदिग्ध वेबसाइट या व्यक्ति के झांसे में न आएं और ऐसी गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
निष्कर्ष
प्रयागराज में फर्जी वेबसाइट के जरिए ठगी करने वाले इस गिरोह का पर्दाफाश होना एक बड़ी उपलब्धि है। यह कार्रवाई न केवल साइबर अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि आम नागरिकों को भी सतर्क रहने का संदेश देती है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिससे भविष्य में इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
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