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वृंदावन: राधावल्लभ मंदिर में खिचड़ी उत्सव, ठाकुरजी ने फल विक्रेता रूप में दिए दर्शन

वृंदावन: राधावल्लभ मंदिर में खिचड़ी उत्सव, ठाकुरजी ने फल विक्रेता रूप में दिए दर्शन

राधावल्लभ मंदिर के खिचड़ी उत्सव में ठाकुरजी ने फल विक्रेता स्वरूप में दर्शन देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर किया।

राधावल्लभ मंदिर में चल रहे एकमासीय खिचड़ी उत्सव के दौरान हर दिन भक्ति और आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिल रहा है। भोर की ठिठुरन भरी सर्दी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हो रहा है। अंधेरी सुबह से ही मंदिर की ओर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। हजारों श्रद्धालु ठाकुर राधावल्लभ लाल के दिव्य दर्शन की अभिलाषा लिए मंदिर पहुंच रहे हैं और उत्सव के आनंद में सहभागी बन रहे हैं। खिचड़ी उत्सव के दौरान ठाकुरजी प्रतिदिन अलग अलग रूपों में दर्शन देकर भक्तों को भावविभोर कर रहे हैं।

गुरुवार की भोर मंदिर के पट खुले तो ठाकुर राधावल्लभ लाल ने फल विक्रेता के रूप में दर्शन दिए। जैसे ही भक्तों की दृष्टि इस अलौकिक स्वरूप पर पड़ी पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रीहित हरिवंश महाप्रभु द्वारा स्थापित इस प्राचीन मंदिर में सर्दी के मौसम को देखते हुए ठाकुरजी की सेवा में विशेष सावधानियां बरती जा रही हैं। ठाकुरजी को ऊनी वस्त्र धारण कराए जा रहे हैं और शीत से बचाव के लिए पारंपरिक विधियों से सेवा की जा रही है जिससे भक्तों की आस्था और भी प्रगाढ़ हो रही है।

भोर में मंगला आरती के समय पंचमेवा युक्त गर्म खिचड़ी का भोग अर्पित किया जा रहा है। गुरुवार सुबह छह बजे के आसपास मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ गई और कुछ ही समय में पूरा प्रांगण भक्तों से खचाखच भर गया। इस दौरान सेवायतों ने जगमोहन में ठाकुरजी के जगार के पदों का गायन आरंभ किया। भक्त एकाग्र चित्त होकर पदों का रसास्वादन करते रहे और वातावरण भक्तिमय बना रहा।

जगार के पदों के बाद जब खिचड़ी के पद गाए गए तो श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ गया। मंगला आरती के लिए सुबह सात बजे जैसे ही मंदिर के पट खुले आराध्य ठाकुर फल विक्रेता के रूप में भक्तों को दर्शन दे रहे थे। ठाकुरजी के इस अलबेले और मनोहारी स्वरूप को देखकर भक्तों की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं रहा। मंदिर परिसर में चारों ओर जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी। खिचड़ी उत्सव के दौरान यह दृश्य प्रतिदिन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद प्रदान कर रहा है और राधावल्लभ मंदिर की भक्ति परंपरा को जीवंत बनाए हुए है।

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