वाराणसी: रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला के दौरान हाथी के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए महावत घपलू नट उर्फ छपलू की इलाज के दौरान मौत हो गई। आजमगढ़ के एक निजी अस्पताल में गुरुवार रात उसने अंतिम सांस ली। 18 अक्टूबर को हाथी के अचानक बेकाबू होने के बाद हुए हमले में घपलू गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे पहले बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन बाद में परिजन बेहतर इलाज की उम्मीद में उसे आजमगढ़ के एक निजी अस्पताल ले गए। हालत बिगड़ने और संक्रमण फैलने के कारण चिकित्सकों को उसका बायां पैर भी काटना पड़ा। इसके बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। घपलू की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सबसे अधिक दर्दनाक स्थिति उसके चार साल के बेटे इसराइल की है, जिसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। गांव में भी शोक का माहौल है।
हाथी को नहलाने ले जा रहा था महावत, तभी हुआ हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आजमगढ़ जिले के बरदह थाना क्षेत्र के असवनिया गांव निवासी यशवंत सिंह उर्फ शिवली सिंह के हाथी की देखभाल की जिम्मेदारी तहबरपुर थाना क्षेत्र के विशुनपुर गांव निवासी घपलू नट पुत्र जन्ना नट के पास थी। वह करीब दस महीने से शिवली सिंह के यहां रहकर हाथी की देखरेख का काम कर रहा था। नवरात्र के दूसरे दिन वह हाथी लेकर रामनगर की रामलीला में शामिल होने आया था। 18 अक्टूबर की सुबह करीब दस बजे वह हाथी को नहलाने के लिए तालाब की ओर ले जा रहा था। इसी दौरान हाथी अचानक बेकाबू हो गया और उसने अपनी सूंड से घपलू को पकड़कर जमीन पर पटक दिया। हमले में महावत को गंभीर चोटें आईं। घटना के समय मौजूद दूसरे महावतों ने किसी तरह उसे हाथी से बचाया। इसके बाद घायल घपलू को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे के बाद से ही उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी।
संक्रमण फैलने पर काटना पड़ा बायां पैर
हाथी के हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद घपलू को 18 अक्टूबर को बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां उपचार के बाद 20 अक्टूबर को परिजन उसे आजमगढ़ के एक निजी अस्पताल ले गए। परिजनों को उम्मीद थी कि बेहतर इलाज से उसकी हालत में सुधार होगा और वह स्वस्थ होकर घर लौट आएगा, लेकिन उसकी स्थिति लगातार गंभीर होती गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उसके शरीर में संक्रमण फैलने लगा था। संक्रमण को नियंत्रित करने और उसकी जान बचाने के प्रयास में 21 अक्टूबर को चिकित्सकों को कूल्हे के पास से उसका बायां पैर काटना पड़ा। इसके बाद भी उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। आखिरकार 22 अक्टूबर की रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद घपलू के दम तोड़ने से परिवार की उम्मीदें टूट गईं। उसकी मौत से पत्नी, मां और अन्य परिजन गहरे सदमे में हैं।
पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी उठाता था घपलू
घपलू नट का जीवन संघर्षों के बीच गुजरा। परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, उसके पिता जन्ना नट भी महावत का काम करते थे। करीब दस वर्ष पहले पिता की मौत हो गई थी। उनके निधन के बाद परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी घपलू के कंधों पर आ गई थी। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए उसने महावत का काम संभाला और इसी मेहनत के सहारे अपने परिजनों की मदद करता रहा। चार भाइयों में तीसरे नंबर पर रहे घपलू की असमय मौत ने परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। जिस व्यक्ति के सहारे परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती थीं, उसके चले जाने से अब परिजनों को भविष्य की चिंता सता रही है। पहले पिता को खोने वाला परिवार अब घपलू की मौत के बाद एक और बड़े दुख से गुजर रहा है।
चार साल के बेटे इसराइल के सिर से उठा पिता का साया
घपलू अपने पीछे पत्नी सरीकुन, चार साल के बेटे इसराइल और मां कलावती को छोड़ गया है। मासूम इसराइल अभी इतनी छोटी उम्र में है कि वह पिता की मौत का अर्थ भी पूरी तरह नहीं समझ सकता, लेकिन अब उसे पिता का स्नेह और साथ नहीं मिल सकेगा। परिवार के लिए यह दुख शब्दों में बयां करना मुश्किल है। घपलू की मां कलावती और पत्नी सरीकुन का रो रोकर बुरा हाल है। घर के अन्य सदस्य भी इस घटना से सदमे में हैं। परिवार के कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी चुनौती बन गया है। घपलू अपने परिवार के लिए मेहनत मजदूरी और महावत का काम करके आजीविका जुटाता था। अब उसकी पत्नी और बुजुर्ग मां के सामने छोटे बच्चे की परवरिश और घर चलाने की चिंता खड़ी हो गई है।
मजदूरी कर परिवार चलाते हैं भाई, आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर
परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर बताई जा रही है। घपलू के बड़े भाई आरिफ उर्फ ठंठू और इसराइल दिल्ली में मजदूरी करते हैं, जबकि सबसे छोटा भाई बबलू मुंबई में मजदूरी कर परिवार की आजीविका में सहयोग करता है। मिली जानकारी के अनुसार, इसराइल घटना से करीब एक सप्ताह पहले ही दिल्ली से घर आया था। परिवार की महिलाओं को भी घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए आसपास के गांवों में अनाज और रुपये मांगने पड़ते हैं। ऐसे हालात में घपलू की मौत ने परिवार की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। परिवार के पास आय का सीमित साधन होने के कारण आने वाले दिनों में आर्थिक जरूरतों को पूरा करना कठिन हो सकता है। पत्नी, छोटे बेटे और बुजुर्ग मां की जिम्मेदारी अब परिवार के अन्य सदस्यों के सामने भी एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है।
रामनगर रामलीला के हादसे ने परिवार को गहरे संकट में डाला
रामनगर की रामलीला में हाथी के हमले की घटना अब एक परिवार के लिए कभी न भरने वाला दुख बन गई है। घपलू नट हाथी की देखभाल करके अपने परिवार का भरण पोषण करता था, लेकिन 18 अक्टूबर को हुए हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसकी जिंदगी समाप्त हो गई। इलाज के दौरान संक्रमण फैलने और पैर काटे जाने के बावजूद चिकित्सक उसे बचा नहीं सके। उसकी मौत के बाद चार साल के बेटे, पत्नी और बुजुर्ग मां के सामने भविष्य की अनिश्चितता खड़ी हो गई है। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए अब उनके भरण पोषण और बच्चे की परवरिश को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। गांव में इस दुखद घटना को लेकर मातम पसरा है। घपलू की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ऐसे हादसों में परिवार के कमाने वाले सदस्य को खोने के बाद पीछे छूट गए आश्रितों के सामने जीवन की चुनौतियां कितनी कठिन हो जाती हैं।
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