गणतंत्र दिवस के अवसर पर वृंदावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में हालात दिनभर चुनौतीपूर्ण बने रहे। सार्वजनिक अवकाश के चलते सुबह से ही दर्शनार्थियों का दबाव बढ़ता गया और दोपहर तक मंदिर परिसर व आसपास की गलियों में धक्का मुक्की और आपाधापी की स्थिति बन गई। श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए एंट्री प्वाइंट से मंदिर प्रांगण तक पहुंचने में करीब दो घंटे तक लग गए।
भीड़ के बीच फंसे बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी। कई स्थानों पर दबाव इतना अधिक था कि लोगों की चीख पुकार सुनाई देने लगी। व्यवस्था संभालने के लिए तैनात पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को दिनभर कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने जगह जगह बैरियर लगाकर श्रद्धालुओं को रोक रोक कर आगे बढ़ाया, लेकिन बैरियर खुलते ही लोग तेजी से आगे दौड़ पड़ते, जिससे स्थिति फिर बिगड़ जाती थी।
सुबह से ही विद्यापीठ और जुगल घाट की ओर से आने वाले मार्गों पर बाजार और संकरी गलियां श्रद्धालुओं से भर गईं। पुलिस द्वारा जब भीड़ कम होती देख बैरियर खोले जाते, तो आगे बढ़ने की होड़ मच जाती। इसी दौरान कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने की घटनाएं भी सामने आईं। बिहारी जी पुलिस चौकी के पास छिंदवाड़ा से आए दीपक के बच्चों की हालत खराब हो गई, जिन्हें पास की दुकान पर बैठाकर कुछ देर आराम कराया गया, तब जाकर वे आगे बढ़ सके। इसी तरह दिल्ली के नजफगढ़ से आए एक बुजुर्ग दंपत्ति को भी मंदिर की एक गली में दुकान पर बैठकर काफी देर तक राहत लेनी पड़ी।
पुलिसकर्मियों ने लगातार लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की, लेकिन भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि आपाधापी का माहौल पूरे दिन बना रहा। सुबह शुरू हुई यह स्थिति शाम तक लगभग बनी रही और मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को लगातार धैर्य के साथ इंतजार करना पड़ा।
गणतंत्र दिवस पर केवल ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर ही नहीं, बल्कि वृंदावन के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। राधावल्लभ मंदिर, राधारमण मंदिर, राधादामोदर मंदिर, रंगजी मंदिर, कात्यायनी मंदिर, प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर में भी सुबह से देर शाम तक भीड़ का दबाव बना रहा। प्रशासन के लिए यह दिन भीड़ प्रबंधन के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रहा।
