सोनभद्र: गैस सिलिंडर की किल्लत से प्रभावित एमडीएम योजना, स्कूलों में फिर चूल्हे पर बन रहा भोजन
सोनभद्र जिले के परिषदीय विद्यालयों में गैस सिलिंडर की कमी के कारण मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना प्रभावित हो रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि गैस पर भोजन बनाने के निर्देश के बावजूद अब स्कूलों में दोबारा चूल्हे पर खाना बनाया जा रहा है। इससे न केवल व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि रसोइयों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
ऑनलाइन बुकिंग में आ रही समस्या
विद्यालयों के शिक्षक गैस सिलिंडर के लिए ऑनलाइन बुकिंग करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सर्वर की समस्या के कारण बुकिंग नहीं हो पा रही है। वहीं ऑफलाइन बुकिंग कराने के बावजूद समय पर सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो रहा है।
कई शिक्षक और ग्राम प्रधान गैस एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन वहां भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।
मजबूरी में चूल्हे पर बन रहा खाना
गैस सिलिंडर न मिलने के कारण रसोइयों को मजबूरी में चूल्हे पर भोजन बनाना पड़ रहा है। इससे निकलने वाला धुआं उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। शिक्षकों का कहना है कि यदि नियमित रूप से सिलिंडर उपलब्ध कराया जाए, तो इस समस्या से आसानी से निजात मिल सकती है।
2061 विद्यालयों में संचालित है योजना
सोनांचल क्षेत्र में कुल 2061 विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना संचालित है, जिनमें परिषदीय विद्यालयों के साथ इंटर कॉलेज भी शामिल हैं। इन विद्यालयों में बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन दिया जाता है।
साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार भोजन
एमडीएम योजना के तहत रविवार को रोटी, सब्जी और मौसमी फल, मंगलवार को चावल और दाल, बुधवार को तहरी और दूध, गुरुवार को दाल-रोटी, शुक्रवार को तहरी और शनिवार को चावल व सब्जी परोसी जाती है।
व्यवस्था सुधार की जरूरत
शिक्षकों और प्रधानों का कहना है कि गैस सिलिंडर की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित तरीके से भोजन मिल सके। वर्तमान स्थिति में यह योजना अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है।
यह समस्या न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा और पोषण व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती भी प्रस्तुत करती है।
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