सोनभद्र पुलिस ने कफ सीरप तस्करी के एक बड़े और संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया है। इस कार्रवाई को अब तक की सबसे बड़ी कफ सीरप तस्करी विरोधी कार्रवाइयों में गिना जा रहा है। पुलिस ने 18 अक्टूबर 2025 को जनपद सोनभद्र में चेकिंग के दौरान दो कंटेनरों से एक लाख उन्नीस हजार छह सौ पचहत्तर प्रतिबंधित कफ सीरप की शीशियां बरामद की थीं जिनकी अनुमानित कीमत करीब तीन करोड़ पचास लाख रुपये आंकी गई थी। यह खेप अवैध रूप से अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजी जा रही थी।
इस बड़ी बरामदगी के बाद पुलिस अधीक्षक Abhishek Verma के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया। जांच आगे बढ़ी तो कफ सीरप तस्करी के पीछे एक संगठित नेटवर्क सामने आया। पुलिस जांच में पता चला कि वाराणसी निवासी शुभम जायसवाल अपने पिता भोला प्रसाद जायसवाल के साथ मिलकर झारखंड की राजधानी रांची में शैली ट्रेडर्स के नाम से एक फर्म का संचालन कर रहा था। इसी फर्म के माध्यम से कई दवा कंपनियों से कफ सीरप की खेप मंगाई जाती थी जिसे तय पते पर भेजने के बजाय देश के विभिन्न राज्यों के साथ साथ बांग्लादेश और अन्य सीमावर्ती इलाकों में अवैध रूप से सप्लाई किया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि तस्करी का नेटवर्क बेहद सुनियोजित था और इसमें कई फर्जी फर्मों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस मामले में सोनभद्र पुलिस ने सरगना शुभम जायसवाल सहित चार आरोपियों पर पच्चीस पच्चीस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के विदेश भागने की चर्चा भी सामने आई है जबकि उसके अन्य सहयोगी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।
सोनभद्र पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 30 नवंबर 2025 को शैली ट्रेडर्स के प्रोपराइटर भोला प्रसाद जायसवाल को कोलकाता से गिरफ्तार किया था। इसके बाद 17 दिसंबर 2025 को वाराणसी निवासी मां कृपा मेडिकल के प्रोपराइटर सत्यम कुमार को भी गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर भोला प्रसाद जायसवाल की करोड़ों रुपये की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को भी कुर्क कर लिया गया है।
इस पूरे प्रकरण में जैसे जैसे परतें खुलती गईं वैसे वैसे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दीं। कई प्रभावशाली नामों से जुड़ाव की चर्चाओं के चलते यह मामला अब देश के सबसे चर्चित कफ सीरप तस्करी मामलों में शामिल हो गया है। हालांकि अब भी मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल पुलिस की पकड़ से बाहर है और सोनभद्र पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सोनभद्र पुलिस की इस कार्रवाई को न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है और इसे संगठित नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
