वाराणसी कफ सीरप तस्करी मामला: अमित टाटा और अमित यादव पेश नहीं हुए, अदालत में दोबारा वारंट बी जारी करने की मांग
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : वाराणसी में कोडीनयुक्त कफ सीरप की अवैध तस्करी से जुड़े बहुचर्चित मामले में कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। इस मामले में लखनऊ जेल में बंद आरोपी अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा और अमित कुमार यादव निर्धारित तिथि पर अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके बाद विवेचक ने पुनः उनके खिलाफ वारंट बी जारी करने की अपील की है। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अदालत में पेशी न होने पर फिर उठाया गया कदम
कोतवाली थाना में दर्ज इस मुकदमे में विवेचक दयाशंकर सिंह ने पहले ही दोनों आरोपियों के खिलाफ वारंट बी जारी करने की मांग की थी। इस पर अपर जिला जज/एफटीसी (14वां वित्त आयोग) मनोज कुमार की अदालत ने वारंट जारी करते हुए 31 मार्च को दोनों को पेश करने का आदेश दिया था। हालांकि, तय तारीख पर दोनों की पेशी नहीं हो सकी।
मंगलवार को जब आरोपी अदालत में पेश नहीं हुए, तो विवेचक ने पुनः अदालत में प्रार्थना पत्र देकर वारंट बी दोबारा जारी करने की मांग की। अब अदालत इस मामले में आगे की कार्रवाई पर विचार कर रही है।
एसटीएफ की कार्रवाई में सामने आया बड़ा नेटवर्क
इस मामले की जांच में उत्तर प्रदेश एसटीएफ की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। एसटीएफ की लखनऊ टीम ने फरवरी माह में मैदागिन निवासी अमित यादव को हरहुआ रिंग रोड काशीधाम के पास से गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि अमित यादव कफ सीरप तस्करी के बड़े नेटवर्क का हिस्सा था।
एसटीएफ के अनुसार, अमित यादव पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक कफ सीरप की तस्करी का मुख्य सूत्रधार था। उसने वाराणसी के सप्तसागर दवा मंडी स्थित अपनी फर्म जीएल सर्जिकल के माध्यम से एक लाख से अधिक शीशियां खरीदी थीं और फर्जी फर्मों के नाम पर बिक्री दिखाकर ऊंचे दाम पर बेचा था।
आरोपियों का आपराधिक इतिहास
जांच में यह भी सामने आया है कि अमित यादव के खिलाफ पहले से दंगा, जानलेवा हमला और धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामलों में केस दर्ज हैं। वहीं, उसके सहयोगी अमित टाटा को एसटीएफ ने पिछले साल नवंबर में लखनऊ के गोमतीनगर से गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में अमित टाटा ने खुलासा किया कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन शुभम नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था, जिसने धनबाद और वाराणसी में फर्जी मेडिकल फर्में बनवाकर तस्करी को अंजाम दिया।
शुभम जायसवाल पर भी शिकंजा
इस मामले में मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल पर भी पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। रोहनिया थाना में उसके खिलाफ अदालत के आदेश की अवहेलना का मामला दर्ज किया गया है। बीएनएस की धारा 209 के तहत दर्ज इस केस में तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
पुलिस के अनुसार, जिम के तहखाने में छिपाकर रखी गई 500 पेटी कोडीनयुक्त कफ सीरप की बरामदगी के मामले में कोर्ट ने शुभम को 30 मार्च तक पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। इसके बाद उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
हवाला कनेक्शन की भी जांच
इस बीच एसआईटी ने संतोष गिरी, अशोक और शशांक नामक युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। इन्हें हवाला के जरिए तस्करी के पैसे को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले नेटवर्क से जुड़ा माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि ये युवक दारा नगर निवासी वैभव जायसवाल के सहयोगी हैं, जो इस नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रहा था। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।
पुलिस का दावा: जल्द होगा बड़ा खुलासा
एसीपी विजय प्रकाश ने कहा है कि कफ सीरप तस्करी मामले में जल्द ही बड़ा खुलासा किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि जांच के दौरान कई अहम सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
वाराणसी में इस मामले को लेकर पुलिस की सक्रियता से यह स्पष्ट है कि अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं।
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