वाराणसी में सनसनीखेज हत्या: गौतस्करी की सूचना देने वाले युवक को पीट-पीटकर मार डाला, पुलिस पर उठे सवाल
वाराणसी: रोहनिया थाना क्षेत्र के पंडितपुर गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौतस्करी की सूचना पुलिस को देने वाले एक युवक की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। यह वारदात न केवल अपराधियों के बढ़ते हौसले को उजागर करती है, बल्कि स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और तत्परता पर भी गहरे सवाल छोड़ती है।
आधी रात घर से उठाकर ले गए हमलावर
मृतक सानू अली को आधी रात कुछ दबंग किस्म के लोग उसके घर से जबरन खींचकर बाहर ले गए। परिजनों के अनुसार, हमलावरों ने पहले उस पर मोबाइल चोरी का आरोप लगाकर हंगामा किया और फिर उसे पुलिस चौकी ले जाने की बात कहकर अपने साथ ले गए।
हालांकि, चौकी ले जाने के बजाय आरोपियों ने उसे गांव के बाहर पेट्रोल पंप के सामने स्थित पुलिया पर ले जाकर बांध दिया और बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि हमलावर तब तक उसे लात-घूसों से पीटते रहे, जब तक वह अचेत नहीं हो गया।
इलाज के दौरान हुई मौत
परिजनों को जब घटना की जानकारी मिली तो वे मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक सानू गंभीर रूप से घायल हो चुका था। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान सुबह उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
पहले दी थी गौतस्करी की सूचना
मृतक के ताऊ अख्तर अली ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि सानू ने पहले ही पुलिस को क्षेत्र में चल रही गौतस्करी की जानकारी दी थी। उसने इसमें शामिल बबलू समेत कई लोगों के नाम भी उजागर किए थे। आरोप है कि पुलिस ने इस सूचना को गंभीरता से नहीं लिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
परिजनों का कहना है कि इसी के बाद से आरोपी सानू को लगातार धमका रहे थे और अंततः उसे निशाना बनाकर हत्या कर दी गई।
पुलिस पर लापरवाही के आरोप
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते पुलिस कार्रवाई करती तो सानू की जान बचाई जा सकती थी। परिजनों का कहना है कि घटना की सूचना रात में ही पुलिस को दे दी गई थी, लेकिन मौके पर पहुंचने के बावजूद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई नहीं की और उल्टा मेडिकल कराने की सलाह देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
कानून-व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि उस खतरनाक स्थिति की ओर इशारा करती है जहां अपराधी खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं। गौतस्करी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सूचना देने वाले व्यक्ति की हत्या यह दर्शाती है कि अपराधियों के मन में कानून का भय कम होता जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले से मिली जानकारी के बावजूद पुलिस निष्क्रिय क्यों रही? क्या यह महज लापरवाही थी या इसके पीछे कोई दबाव काम कर रहा था? इस पूरे घटनाक्रम ने शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें
सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था को लेकर सख्ती के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इस घटना के जरिए कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। आम नागरिकों के बीच भय और असुरक्षा की भावना बढ़ती नजर आ रही है।
अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करती है। क्या आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कोई कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा,इन सवालों के जवाब का इंतजार पूरे क्षेत्र को है।
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