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वाराणसी: वीडीए ने महिला की जमीन अपोलो को बेची, प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल

वाराणसी: वीडीए ने महिला की जमीन अपोलो को बेची, प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल

वाराणसी विकास प्राधिकरण ने एक महिला की जमीन अपोलो अस्पताल को बेच दी, जिससे सरकारी संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं।

शहर में भूमाफिया की सक्रियता कोई नई बात नहीं है लेकिन जब वही भूमिका किसी सरकारी एजेंसी की सामने आए तो यह न केवल चौंकाने वाला बल्कि गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। वाराणसी में ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां वाराणसी विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि प्राधिकरण ने दूसरी की जमीन को अपोलो हास्पिटल को बेच दिया। जब पीड़ित महिला को इसकी जानकारी हुई तो वह रोते बिलखते विकास प्राधिकरण कार्यालय पहुंच गई। वहां मौजूद अधिकारियों को जैसे ही पूरे मामले की भनक लगी वे भी सन्न रह गए और तत्काल स्थिति को संभालने के लिए डैमेज कंट्रोल में जुट गए।

शहर और आसपास के इलाकों में कालोनाइजर बिल्डर और अन्य लोग जमीन फ्लैट और मकान बेचने के नाम पर लंबे समय से लोगों को ठगते रहे हैं। ऐसे कई मामले थानों और न्यायालयों में विचाराधीन हैं जिनमें लोगों की जीवन भर की कमाई तक दांव पर लग गई है। इन्हीं कारणों से आम लोग निजी बिल्डरों के बजाय आवास विकास परिषद और विकास प्राधिकरण जैसी सरकारी संस्थाओं पर भरोसा करते हैं। लेकिन जब वही संस्थाएं सवालों के घेरे में आ जाएं तो लोगों के पास न्याय के लिए जाने का रास्ता भी धुंधला हो जाता है।

मामला बड़ा लालपुर आवासीय योजना से जुड़ा है जहां हाल ही में विकास प्राधिकरण ने अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल को 13109.66 वर्ग मीटर जमीन बेची। यह सौदा 14 मार्च 2024 को 91 करोड़ 14 लाख 34 हजार 365 रुपये में किया गया था। जमीन की रजिस्ट्री हरीश मोहन जनरल मैनेजर प्रोजेक्ट के नाम पर हुई और इसके बाद उसी जमीन पर नक्शा भी पास कर दिया गया। पूरी प्रक्रिया में निबंधन कार्यालय से लेकर संपत्ति अनुभाग तक के अधिकारी शामिल रहे।

विवाद तब सामने आया जब हास्पिटल प्रबंधन जमीन पर कब्जा लेने पहुंचा। मौके पर पहुंचे काश्तकारों ने जमीन बेचने से साफ इनकार कर दिया और खुद को वास्तविक मालिक बताया। मामला बढ़ते बढ़ते विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष तक पहुंचा। उपाध्यक्ष ने टीम गठित कर जांच और कब्जा दिलाने के निर्देश दिए। जांच में कर्मचारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई। इसके बाद आनन फानन में तीन जनवरी को उसी आराजी नंबर से तीन काश्तकारों के नाम रजिस्ट्री कराई गई जिससे मामला और उलझ गया।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बिंदु देवी नामक महिला ने विकास प्राधिकरण पर जबरन जमीन कब्जाने का आरोप लगाते हुए कार्यालय में हंगामा किया। उनकी भावनात्मक स्थिति और जान देने की बात सुनकर अधिकारियों और कर्मचारियों के होश उड़ गए। किसी तरह उन्हें समझा बुझाकर घर भेजा गया लेकिन इस घटना ने प्राधिकरण की कार्यशैली पर गहरे सवाल छोड़ दिए।

नियम के अनुसार विकास प्राधिकरण किसी भी जमीन को बेचने से पहले अवाप्ति अनुभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेता है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि जमीन किसके नाम दर्ज है आराजी नंबर क्या है और क्षेत्रफल कितना है। इसके बाद ही संपत्ति अनुभाग के माध्यम से रजिस्ट्री की जाती है। अपोलो हास्पिटल के मामले में भी यह प्रक्रिया कागजों में पूरी दिखाई गई लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और निकली।

बड़ा लालपुर आवासीय योजना के निर्माण के समय वहां सीवर लाइन की व्यवस्था नहीं थी। प्राधिकरण ने सेफ्टी टैंक बनवाया और प्लाटिंग कर जमीन को अपने कब्जे में दिखाया। अपोलो हास्पिटल ने किसी विवाद से बचने के उद्देश्य से सरकारी एजेंसी से जमीन खरीदी थी लेकिन अब उन्हें भी कानूनी और प्रशासनिक उलझनों का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला केवल एक जमीन सौदे तक सीमित नहीं है बल्कि यह विकास प्राधिकरण की पारदर्शिता और आम जनता के भरोसे पर सीधा आघात है।

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