वाराणसी: दिव्यांग से जमीन और 30 लाख की ठगी का बड़ा खुलासा, FIR से सामने आई संगठित साजिश
वाराणसी के रोहनिया थाना क्षेत्र के गंगापुर में दिव्यांग व्यक्ति की संपत्ति हड़पने और 30 लाख रुपये की ठगी का मामला अब पूरी तरह उजागर हो चुका है। इस मामले में दर्ज एफआईआर से यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से मानसिक रूप से दिव्यांग युवक को निशाना बनाकर उसकी जमीन अपने नाम करा ली और बैंक खातों के जरिए बड़ी रकम निकाल ली।
एफआईआर में दर्ज पूरा मामला
रोहनिया थाना में दर्ज एफआईआर संख्या 0032/2026 के अनुसार शिकायतकर्ता सामू ने आरोप लगाया है कि उसके मानसिक रूप से दिव्यांग भाई रामू को आरोपियों ने धोखे में रखकर उसकी संपत्ति हड़प ली। एफआईआर 3 फरवरी 2026 को दर्ज की गई, जबकि घटना 8 सितंबर 2025 की बताई गई है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जो धोखाधड़ी और संपत्ति हड़पने से संबंधित है।
चार आरोपियों के नाम सामने आए
एफआईआर में चार आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें मनोज कुमार राय निवासी केसरीपुर, रामाश्रय निवासी मंडुवाडीह, शुभम प्रजापति निवासी भिखारीपुर (चुनार रोड) और अनुराग शुक्ला निवासी ककरमत्ता शामिल हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह सभी आरोपी एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे थे और हर व्यक्ति की भूमिका पहले से तय थी।
दिव्यांगता का फायदा उठाकर रची गई साजिश
एफआईआर के अनुसार आरोपियों ने पहले पीड़ित को दिव्यांग पेंशन दिलाने का झांसा दिया। इसके बाद उसे बहला-फुसलाकर गंगापुर रजिस्ट्रार कार्यालय ले जाया गया और उसके अंगूठे के निशान लेकर जमीन का बैनामा करा लिया गया।
बैनामे में गाटा संख्या 1368 और 217 की जमीन शामिल है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 84 एयर बताया गया है, जो करीब सात बिस्वा के आसपास है।
फर्जी दस्तावेज और बैंक खातों का इस्तेमाल
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पीड़ित के नाम से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और मोबाइल सिम कार्ड बनवाया। इसके बाद Axis Bank हरदत्तपुर और HDFC बैंक राजातालाब में खाते खुलवाए गए।
आरोपियों ने चेकबुक, एटीएम कार्ड और अन्य बैंकिंग साधनों को अपने कब्जे में रखा और इन खातों से लगातार पैसे निकालते रहे।
30 लाख रुपये की निकासी
एफआईआर में उल्लेख है कि जमीन के नाम पर प्राप्त करीब 30 लाख रुपये आरोपियों ने एटीएम, चेक और अन्य माध्यमों से निकाल लिए। अंततः बैंक खातों में कोई राशि शेष नहीं बची।
यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से आर्थिक अपराध को अंजाम दिया।
गवाह भी बने साजिश का हिस्सा
एफआईआर के अनुसार शुभम प्रजापति और अनुराग शुक्ला ने बैनामे में गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए और पूरी साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई। पुलिस का मानना है कि यह पूरा अपराध एक संगठित गिरोह द्वारा किया गया।
जांच अधिकारी और आगे की कार्रवाई
इस मामले की जांच उपनिरीक्षक पवन कुमार को सौंपी गई है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और अब इस गिरोह से जुड़े अन्य संभावित लोगों की तलाश की जा रही है।
निष्कर्ष
गंगापुर का यह मामला समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाकर किए जा रहे संगठित अपराध का एक गंभीर उदाहरण है। एफआईआर से यह स्पष्ट होता है कि किस प्रकार योजनाबद्ध तरीके से फर्जी दस्तावेज, बैंकिंग सिस्टम और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर एक दिव्यांग व्यक्ति की संपत्ति और धन हड़प लिया गया।
पुलिस की कार्रवाई से इस मामले में न्याय की उम्मीद जगी है, वहीं यह घटना आम लोगों के लिए सतर्क रहने का भी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है।
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