वाराणसी में गंगा प्रदूषण पर जल पुलिस की सख्ती, धुआं फैलाने वाली मोटरबोट और बजड़ा हुआ सीज

3 Min Read
दशाश्वमेध घाट के पास प्रदूषण फैलाने वाले जलयानों पर जल पुलिस का शिकंजा।

वाराणसी: मोक्षदायिनी माँ गंगा की लहरों पर मंडराते काले धुएं के बादलों और बढ़ते प्रदूषण को लेकर वाराणसी जल पुलिस ने अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। प्रशासन का यह सख्त रुख सोमवार को तब देखने को मिला जब जल पुलिस ने गंगा की स्वच्छता को चुनौती दे रहे लापरवाह संचालकों के खिलाफ एक निर्णायक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। नियमों को ताक पर रखकर गंगा की आबोहवा बिगाड़ रहे एक मोटरबोट और एक विशाल बजड़े को पुलिस ने तत्काल प्रभाव से जब्त (सीज) कर लिया है। यह कार्रवाई न केवल एक दंडात्मक प्रक्रिया है, बल्कि काशी के घाटों पर मनमानी कर रहे संचालकों के लिए एक स्पष्ट संदेश भी है कि आस्था की इस नगरी में पर्यावरण के साथ खिलवाड़ अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बीते कुछ दिनों से दशाश्वमेध और उसके आसपास के प्रमुख घाटों से लगातार यह शिकायतें सामने आ रही थीं कि गंगा में दौड़ रहे जलयानों से निकलता अनियंत्रित और जहरीला धुआं वहां आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों का दम घोंट रहा है। जिस अलौकिक शांति और नैसर्गिक सौंदर्य की तलाश में दुनिया भर से लोग काशी आते हैं, वह डीजल के काले गुबार में ओझल होता महसूस हो रहा था। इन शिकायतों की गंभीरता को समझते हुए जल पुलिस ने सोमवार को एक विशेष औचक निरीक्षण अभियान छेड़ा। जांच की आंच जब घाटों पर पहुंची, तो पाया गया कि कई वाहन संचालक चंद पैसों के लालच में न केवल खराब गुणवत्ता वाले ईंधन का इस्तेमाल कर रहे थे, बल्कि उनके इंजनों की ‘फिटनेस’ भी मानकों के विपरीत थी। मौके पर ही नियमों का खुला उल्लंघन पाए जाने पर पुलिस ने त्वरित एक्शन लेते हुए प्रदूषण फैला रहे वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया।

इस अभियान की गूंज पूरे नाविक समाज में महसूस की गई। कार्रवाई के दौरान पुलिस की नजर एक अन्य मोटरबोट संचालक पर भी पड़ी, जो नियमों की अनदेखी कर रहा था। हालांकि, उसे प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर भविष्य के लिए बेहद सख्त हिदायत और ‘अंतिम चेतावनी’ देकर छोड़ा गया, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया गया कि अगली गलती पर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। जल पुलिस के आला अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि गंगा केवल एक नदी नहीं, हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। इसके संरक्षण में कोताही अक्षम्य है। सभी संचालकों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल मानक ईंधन का ही प्रयोग करें और समय-समय पर अपने वाहनों का रखरखाव सुनिश्चित करें। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि अब गंगा की धारा में धुएं का जहर घुलता मिला, तो कार्रवाई और भी कठोर होगी।