वाराणसी में घुड़दौड़ का रोमांच, बाबू आरएन सिंह खेल मेला में ‘शक्ति’ ने मारी बाजी
वाराणसी। जनपद में खेलों को बढ़ावा देने और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के उद्देश्य से आयोजित बाबू आरएन सिंह खेल मेला के तहत सोमवार को परमानंदपुर मिनी स्टेडियम में घुड़दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस रोमांचक प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपनी दक्षता और घोड़ों की बेहतरीन ट्रेनिंग का प्रदर्शन किया, जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
चार किलोमीटर की दौड़ में ‘शक्ति’ रही सबसे तेज
प्रतियोगिता की सबसे खास बात चार किलोमीटर लंबी दौड़ रही, जिसमें हरि नारायण के राजस्थानी घोड़े ‘शक्ति’ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मात्र 2 मिनट 28 सेकंड में दौड़ पूरी कर प्रथम स्थान हासिल किया। घोड़े की रफ्तार और संतुलन ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
दूसरे स्थान पर गौरव यादव का घोड़ा ‘रॉकेट’ रहा, जिसने 3 मिनट 40 सेकंड में दौड़ पूरी की। वहीं तीसरे स्थान पर सौरभ का घोड़ा ‘शेरू’ रहा, जिसने चार मिनट में अपनी दौड़ पूरी की।
मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों ने भी दिखाई ताकत
इस प्रतियोगिता में दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले घोड़े मारवाड़ी नस्ल के थे, जो अपनी तेज रफ्तार, सहनशक्ति और संतुलन के लिए जाने जाते हैं। इन घोड़ों के प्रदर्शन ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया और पारंपरिक नस्लों की उपयोगिता को भी दर्शाया।
विशिष्ट अतिथियों ने किया शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश एडवेंचर स्पोर्ट्स क्लब की अध्यक्ष डॉ. आशा सिंह ने हरी झंडी दिखाकर किया। आयोजन की जिम्मेदारी डॉ. ए के सिंह ने संभाली, जिनके नेतृत्व में यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, खेल प्रेमी और प्रतिभागियों के समर्थक उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रतियोगिता का उत्साहपूर्वक आनंद लिया।
स्थानीय प्रतिभाओं को मिला मंच
इस घुड़दौड़ प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य वाराणसी में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना और ग्रामीण एवं स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना था। प्रतिभागियों ने बताया कि उन्होंने अपने घोड़ों को इस प्रतियोगिता के लिए कई महीनों तक विशेष प्रशिक्षण दिया था।
इस प्रकार के आयोजन न केवल खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि युवाओं को भी खेलों की ओर आकर्षित करते हैं और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देते हैं।
खेलों के साथ परंपरा का संगम
घुड़दौड़ जैसे पारंपरिक खेल आयोजन भारतीय संस्कृति और ग्रामीण परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे आयोजन न केवल खेल प्रतियोगिता होते हैं, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत को भी जीवित रखते हैं।
परमानंदपुर मिनी स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि वाराणसी में खेलों के प्रति उत्साह और प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।
भविष्य में और आयोजन की योजना
आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के खेल आयोजनों को निरंतर आयोजित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को खेलों से जोड़ा जा सके।
यह आयोजन न केवल प्रतिभागियों के लिए प्रतिस्पर्धा का मंच बना, बल्कि दर्शकों के लिए भी एक यादगार अनुभव साबित हुआ। घोड़ों की रफ्तार, प्रतिभागियों का आत्मविश्वास और दर्शकों का उत्साह इस आयोजन की सफलता का प्रमाण रहा।
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