वाराणसी: हॉकी के जादूगर पद्मश्री मोहम्मद शाहिद की याद में बनेगा संग्रहालय
वाराणसी में हॉकी के महान खिलाड़ी पद्मश्री मोहम्मद शाहिद की स्मृतियों को सहेजने के लिए एक विशेष संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर क्रीड़ा संकुल, बड़ा लालपुर में इस संग्रहालय को विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करना और शाहिद के खेल जीवन को संरक्षित करना है।
मास्को ओलंपिक के स्वर्ण पदक सहित कई यादगार वस्तुएं होंगी प्रदर्शित
संग्रहालय में वर्ष 1980 के मास्को ओलंपिक में भारत द्वारा जीता गया स्वर्ण पदक प्रमुख आकर्षण होगा। इसके अलावा शाहिद द्वारा जीती गई ट्रॉफियां, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पदक, उनकी जर्सी और दुर्लभ तस्वीरें भी प्रदर्शित की जाएंगी।
अर्जुन अवॉर्ड और पद्मश्री सम्मान भी होंगे शामिल
मोहम्मद शाहिद को वर्ष 1980 में अर्जुन अवॉर्ड और 1986 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। ये सम्मान भी संग्रहालय में दर्शकों के लिए प्रदर्शित किए जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय हॉकी में शानदार करियर
मोहम्मद शाहिद ने 1979 में फ्रांस में आयोजित जूनियर वर्ल्ड कप से अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। उसी वर्ष उन्होंने मलेशिया में फोर नेशन हॉकी टूर्नामेंट में सीनियर टीम का प्रतिनिधित्व किया।
उन्होंने 1980, 1984 और 1988 के ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1982 एशियन गेम्स में रजत और 1986 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे। अपने करियर में उन्होंने 167 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 66 गोल किए।
“मास्टर ऑफ ड्रिब्लिंग” के नाम से थे प्रसिद्ध
मोहम्मद शाहिद को उनके अद्भुत खेल कौशल के लिए “मास्टर ऑफ ड्रिब्लिंग” कहा जाता था। उनकी बॉडी फेंट और गेंद पर नियंत्रण की कला विश्वभर में सराही जाती थी। 1986 में लंदन में आयोजित हॉकी वर्ल्ड कप में उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब भी मिला।
वाराणसी से रहा गहरा जुड़ाव
मोहम्मद शाहिद का जन्म 14 अप्रैल 1960 को वाराणसी में हुआ था। खेल से संन्यास लेने के बाद उन्होंने बरेका में वरिष्ठ क्रीड़ा अधिकारी के रूप में सेवाएं दीं। 20 जुलाई 2016 को हरियाणा के मेदांता अस्पताल में उनका निधन हो गया।
हर वर्ष आयोजित होती है प्रतियोगिता
उनकी स्मृति में उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय द्वारा वाराणसी में हर वर्ष अखिल भारतीय पद्मश्री मोहम्मद शाहिद प्राइज मनी हॉकी प्रतियोगिता आयोजित की जाती है।
युवाओं को मिलेगी प्रेरणा
हॉकी वाराणसी के अध्यक्ष डॉ. एके सिंह और सचिव केबी रावत ने बताया कि इस संग्रहालय के निर्माण से नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और वे शाहिद के खेल जीवन से सीख लेकर आगे बढ़ेंगे।
यह संग्रहालय न केवल एक खिलाड़ी को श्रद्धांजलि होगा, बल्कि भारतीय हॉकी के स्वर्णिम इतिहास को भी संजोने का महत्वपूर्ण प्रयास साबित होगा।
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