वाराणसी: शहर में रथयात्रा से गुरुबाग जाने वाले मार्ग पर स्थित थिओसोफिकल सोसाइटी परिसर में दयाल ग्रुप के होटल निर्माण को लेकर शुक्रवार को विवाद गहरा गया। निर्माण को ध्वस्त कराने पहुंची वाराणसी विकास प्राधिकरण की टीम को मौके पर विरोध का सामना करना पड़ा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक हुई और परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बन गई। कार्रवाई के लिए वीडीए की टीम पुलिस बल और बुलडोजर के साथ पहुंची थी। हालांकि होटल पक्ष के विधिक सलाहकारों की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट का स्थगन आदेश प्रस्तुत किए जाने के बाद प्राधिकरण की टीम ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोक दी और मौके से लौट गई। जमीन के स्वामित्व और लीज से जुड़े विवाद के बीच होटल निर्माण का मामला अब कानूनी प्रक्रिया से भी जुड़ गया है।
वीडीए सचिव के नेतृत्व में पहुंची टीम
जानकारी के अनुसार वाराणसी विकास प्राधिकरण की टीम शुक्रवार को सचिव वेद प्रकाश मिश्र के नेतृत्व में थिओसोफिकल सोसाइटी परिसर पहुंची थी। टीम के साथ पुलिस बल और बुलडोजर भी मौजूद था। प्राधिकरण की ओर से होटल निर्माण को ध्वस्त कराने की कार्रवाई प्रस्तावित थी। टीम के मौके पर पहुंचते ही होटल निर्माण से जुड़े लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद परिसर में काफी देर तक नोकझोंक और हंगामे जैसी स्थिति बनी रही। मौके पर पुलिस की मौजूदगी के बीच घटनाक्रम आगे बढ़ा। इसी दौरान होटल पक्ष के विधिक सलाहकारों ने हाईकोर्ट का स्थगन आदेश दिखाया। आदेश प्रस्तुत किए जाने के बाद वीडीए की टीम ने कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई और वापस लौट गई।
नक्शा निरस्त होने के बाद जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश
वीडीए सचिव वेद प्रकाश मिश्र ने बताया कि थिओसोफिकल सोसाइटी परिसर में निर्माणाधीन होटल का नक्शा निरस्त किए जाने के बाद ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया गया था। इसी आदेश का अनुपालन कराने के लिए प्राधिकरण की टीम मौके पर पहुंची थी। उनके अनुसार होटल पक्ष के विधिक सलाहकारों ने हाईकोर्ट का स्थगन आदेश प्रस्तुत किया, जिसके बाद कार्रवाई रोक दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। इस घटनाक्रम से साफ है कि प्राधिकरण की ओर से जारी ध्वस्तीकरण आदेश और होटल पक्ष की ओर से प्रस्तुत न्यायालय के आदेश के बीच कानूनी स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। आगे की कार्रवाई संबंधित आदेशों और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप ही की जा सकेगी।
जमीन के स्वामित्व और लीज को लेकर विवाद
थिओसोफिकल सोसाइटी परिसर में होटल निर्माण को लेकर जमीन के स्वामित्व और लीज से संबंधित विवाद भी चर्चा में है। ऐसे मामलों में भूमि पर अधिकार, लीज की शर्तें, निर्माण की अनुमति और संबंधित प्राधिकरणों के आदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर जमीन के स्वामित्व या लीज से जुड़े विवाद के सभी पहलुओं का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इस संबंध में संबंधित दस्तावेजों और न्यायालय के आदेशों की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह है कि वीडीए की टीम ध्वस्तीकरण आदेश के अनुपालन के लिए मौके पर पहुंची थी, लेकिन होटल पक्ष की ओर से हाईकोर्ट का स्थगन आदेश प्रस्तुत किए जाने के बाद कार्रवाई रोक दी गई। स्थगन आदेश की शर्तें और उसका दायरा आगे की कार्रवाई को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए मामले में किसी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी या निर्माण की वैधता को लेकर अंतिम निष्कर्ष न्यायालय के आदेशों और संबंधित अभिलेखों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर
वाराणसी विकास प्राधिकरण के सचिव वेद प्रकाश मिश्र के मुताबिक आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। फिलहाल मौके पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोक दी गई है। अब इस मामले में हाईकोर्ट के स्थगन आदेश की शर्तें और प्राधिकरण के मूल आदेश महत्वपूर्ण होंगे। जब तक न्यायालय के आदेश की वास्तविक स्थिति और उसके प्रभाव का स्पष्ट आकलन नहीं हो जाता, तब तक आगे की कार्रवाई उसी के अनुरूप की जानी होगी।
वाराणसी के रथयात्रा से गुरुबाग मार्ग पर स्थित थिओसोफिकल सोसाइटी परिसर में होटल निर्माण को लेकर सामने आए इस घटनाक्रम ने भूमि संबंधी विवाद और निर्माण नियंत्रण की प्रक्रिया को फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर वीडीए ने नक्शा निरस्त होने के बाद ध्वस्तीकरण आदेश के अनुपालन की बात कही है, वहीं दूसरी ओर होटल पक्ष ने हाईकोर्ट का स्थगन आदेश प्रस्तुत किया है। मामले का अगला कदम संबंधित न्यायिक आदेशों और प्राधिकरण की नियमानुसार कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
LATEST NEWS