वाराणसी के लहरतारा में दर्दनाक हादसा: पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से मकान ढहा, भाई-बहन की मौत, कई घायल
वाराणसी के मंडुआडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत लहरतारा स्थित कबीर बालिका स्कूल के पास मंगलवार तड़के एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया, जब साहनी परिवार का मकान अचानक भरभराकर जमींदोज हो गया। अलसुबह हुए इस हादसे में घर के भीतर सो रहे लोग मलबे में दब गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से तत्काल राहत कार्य शुरू किया गया, जबकि सूचना मिलते ही लहरतारा चौकी प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य में जुट गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मकान के गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। घटना के बाद सबसे पहले स्थानीय पुलिस और चौकी प्रभारी ने मोर्चा संभाला और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। इसके बाद फायर ब्रिगेड, आपदा राहत टीम और एनडीआरएफ की टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालकर तत्काल ट्रामा सेंटर भेजा गया।
इस हादसे में सगे भाई-बहन की दर्दनाक मौत की सूचना है, जबकि चार अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आसपास के कई मकानों की दीवारों में भी दरारें आ गई हैं, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है।
घटना के कारणों को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में सड़क और सीवर से जुड़े विकास कार्य बेहद धीमी गति से चल रहे हैं। जगह-जगह गड्ढे खोदकर महीनों तक खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे सीवर का पानी जमीन के भीतर फैलकर मकानों की नींव को कमजोर कर रहा है। लोगों का आरोप है कि इसी लापरवाही का नतीजा आज इस दर्दनाक हादसे के रूप में सामने आया है।
घटना के बाद इलाके में आक्रोश भी देखने को मिला। स्थानीय निवासियों ने पीडब्ल्यूडी और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते निर्माण कार्यों में सुधार किया गया होता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर जिम्मेदार विभाग और अधिकारी इस तरह की खतरनाक स्थितियों को नजरअंदाज क्यों करते रहे।
इस बीच, कुछ लोगों द्वारा सिलेंडर विस्फोट को हादसे का कारण बताए जाने की अफवाह भी फैली, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है। प्रारंभिक जांच में मकान की नींव कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी हुई है, ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
हादसे के बाद पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सूचना मिलने के बावजूद मंडुआडीह इंस्पेक्टर मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे लोगों में नाराजगी है। वहीं, उच्च अधिकारियों के देर से पहुंचने को लेकर भी क्षेत्र में चर्चा बनी हुई है।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि पीड़ित परिवार को न्याय और सहायता कब मिलेगी। क्या प्रशासन और पीडब्ल्यूडी इस हादसे की जिम्मेदारी तय कर पाएंगे? क्या मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा मिलेगा? और क्या भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे? ये सभी सवाल अब स्थानीय जनता और पीड़ित परिवार के सामने खड़े हैं।
फिलहाल राहत और बचाव कार्य पूरा कर लिया गया है, लेकिन इलाके में दहशत का माहौल कायम है। लोग अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति न हो सके।
— रिपोर्ट: अमित मिश्रा
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