वाराणसी में फर्जी दस्तावेज से जमीन हड़पने और बैंक धोखाधड़ी का खुलासा, 3 अभियुक्त गिरफ्तार
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : वाराणसी। थाना रोहनिया पुलिस ने एक संगठित धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर एक मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्ति की पैतृक जमीन अपने नाम करवाने और उसके बैंक खाते से लाखों रुपये निकालने में संलिप्त था।
अभियान के तहत हुई कार्रवाई
पुलिस आयुक्त वाराणसी के निर्देश पर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में, पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन के निर्देशन और अपर पुलिस उपायुक्त के पर्यवेक्षण में थाना रोहनिया पुलिस टीम ने “ऑपरेशन चक्रव्यूह” के तहत यह कार्रवाई की।
सहायक पुलिस आयुक्त रोहनिया के नेतृत्व में पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली, जिसके आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों अभियुक्तों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी का विवरण
1. मनोज पटेल पुत्र हीरालाल पटेल, निवासी ग्राम ऊंचगांव, थाना लोहता, वाराणसी (उम्र करीब 30 वर्ष)
2. विकास राय पुत्र रामधनी राम, निवासी ग्राम कनेरी, थाना रोहनिया, वाराणसी (उम्र करीब 21 वर्ष)
3. मनोज कुमार राय पुत्र हीरालाल, निवासी ग्राम केशरीपुर, थाना रोहनिया, वाराणसी (उम्र करीब 32 वर्ष)
गिरफ्तारी का स्थान और समय
मनोज पटेल और विकास राय को दिनांक 29.03.2026 को रात्रि 23:10 बजे सजोई रिंग रोड स्थित वेलकम रेस्टोरेंट के पास से गिरफ्तार किया गया।
वहीं मनोज कुमार राय को दिनांक 30.03.2026 को सुबह 07:15 बजे पंचायत भवन केशरीपुर के पास मोहनसराय-लहरतारा सर्विस रोड से गिरफ्तार किया गया।
मामले का पूरा घटनाक्रम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वादी द्वारा 03 फरवरी 2026 को थाना रोहनिया में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अभियुक्तों ने वादी के भाई, जो मानसिक रूप से दिव्यांग (लगभग 75 प्रतिशत) हैं, को बहला-फुसलाकर उसकी पैतृक जमीन अपने नाम करा ली।
अभियुक्तों ने पीड़ित को गंगापुर स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय ले जाकर 08 सितंबर 2025 को उसकी जमीन के दो गाटा (करीब 84 एरियर) अपने नाम कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री करवा ली।
धोखाधड़ी का तरीका (Modus Operandi)
जांच में सामने आया कि अभियुक्तों ने सुनियोजित तरीके से पहले पीड़ित का पैन कार्ड बनवाया और दो अलग-अलग बैंकों में उसके नाम से खाते खुलवाए। इन खातों में अभियुक्तों ने अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज कराए, जिससे बैंक से संबंधित सभी ओटीपी और कॉल उन्हीं के पास पहुंचते थे।
इसके बाद अभियुक्तों ने पीड़ित से हस्ताक्षर कराकर एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक अपने कब्जे में ले ली। जमीन की रजिस्ट्री के बाद मिलने वाली रकम को आरटीजीएस के माध्यम से पीड़ित के खाते में ट्रांसफर कराया गया और तुरंत एटीएम व चेक के जरिए निकाल लिया गया।
इस तरह अभियुक्तों ने पीड़ित के खाते से लाखों रुपये निकाल लिए और खाते में कोई शेष राशि नहीं छोड़ी।
कूटरचित मेडिकल दस्तावेजों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि अभियुक्तों ने पीड़ित के नाम से फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र तैयार किए, जिससे यह दिखाया जा सके कि वह मानसिक रूप से सक्षम है। इसी आधार पर रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
पंजीकृत धाराएं और केस विवरण
मु0अ0सं0 0032/2026, धारा 319(2), 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2) बीएनएस, थाना रोहनिया, कमिश्नरेट वाराणसी।
आपराधिक इतिहास
अभियुक्तों के विरुद्ध उपरोक्त मुकदमा दर्ज है और अन्य आपराधिक गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस टीम का विवरण
प्रभारी निरीक्षक राजू सिंह
उप निरीक्षक पवन कुमार
उप निरीक्षक श्याम नारायण यादव
हेड कांस्टेबल वेद प्रकाश राय
कांस्टेबल नागेंद्र गुप्ता
कांस्टेबल ओम प्रकाश सिंह
(थाना रोहनिया, कमिश्नरेट वाराणसी)
पुलिस का बयान
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह एक संगठित गिरोह है, जो कमजोर और असहाय व्यक्तियों को निशाना बनाकर उनकी संपत्ति हड़पने का काम करता था। मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश की जा रही है।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि इस प्रकार की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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