जनपद वाराणसी के थाना लोहता क्षेत्र अंतर्गत ग्राम छितौनी में दर्ज एक गंभीर आपराधिक मामले को लेकर पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में पीड़ित ने पुलिस पर निष्क्रियता और लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का कहना है कि घटना को एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई है, जिससे उसका और उसके परिवार का जीवन लगातार खतरे में बना हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम छितौनी निवासी नीरज कुमार सिंह पुत्र अनिल कुमार सिंह पर 15 दिसंबर 2025 को शाम लगभग 3:10 बजे पुरानी पारिवारिक रंजिश के चलते जानलेवा हमला किया गया। आरोप है कि पटीदार के ही कुछ लोगों ने एकजुट होकर नीरज कुमार सिंह पर लोहे की रॉड और अन्य धारदार हथियारों से हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में नीरज कुमार सिंह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर गिर पड़े, जिससे गांव में अफरा तफरी का माहौल बन गया।
हमले में पीड़ित के सिर, बाएं हाथ और बाएं पैर में गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों की सहायता से उन्हें तत्काल सरकारी अस्पताल श्री शिवप्रसाद गुप्त चिकित्सालय कबीरचौरा वाराणसी में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताया। डॉक्टरों के अनुसार सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गहरी चोटों के कारण पीड़ित को लंबे समय तक इलाज की आवश्यकता है और वह अब भी उपचाराधीन है। इस घटना के बाद से पीड़ित का परिवार मानसिक तनाव, भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन व्यतीत करने को मजबूर है।
पीड़ित ने बताया कि इस घटना के संबंध में थाना लोहता में मुकदमा अपराध संख्या 0338/2025 दर्ज कराया गया था और विवेचना संबंधित विवेचक को सौंपी गई। इसके बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़ित का आरोप है कि स्थानीय पुलिस प्रभावशाली आरोपियों के दबाव में काम कर रही है, जिसके चलते न तो उनकी गिरफ्तारी हो रही है और न ही उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। इससे अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
पीड़ित का यह भी कहना है कि आरोपी खुलेआम गांव और आसपास के क्षेत्र में घूम रहे हैं। वे लगातार पीड़ित और उसके परिजनों पर मुकदमा वापस लेने और जबरन समझौता करने का दबाव बना रहे हैं। इसके साथ ही जान से मारने की धमकियां भी दी जा रही हैं। इन धमकियों के चलते पीड़ित और उसका परिवार भय के साए में जीने को मजबूर है और किसी भी समय किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
पीड़ित के अनुसार उसने इस पूरे मामले को लेकर 29 दिसंबर 2025 को पुलिस कमिश्नर वाराणसी को भी लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा था। इस प्रार्थना पत्र में उसने पूरे घटनाक्रम, हमले की गंभीरता, मेडिकल रिपोर्ट और आरोपियों द्वारा दी जा रही धमकियों का विस्तार से उल्लेख किया था। हालांकि, इतने समय बाद भी पुलिस प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे पीड़ित का विश्वास कानून व्यवस्था से डगमगाने लगा है।
पीड़ित ने यह भी बताया कि वह भारतीय जनता पार्टी का सक्रिय कार्यकर्ता है और हमेशा कानून व्यवस्था व प्रशासन के प्रति सम्मान रखता आया है। इसके बावजूद उसे स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिल पा रहा है। उसका कहना है कि यदि एक आम नागरिक या राजनीतिक कार्यकर्ता को भी इस तरह न्याय के लिए भटकना पड़े, तो इससे कानून व्यवस्था पर आम जनता का भरोसा कमजोर होता है।
लगातार मिल रही धमकियों और पुलिस की कथित उदासीनता से परेशान होकर अंततः पीड़ित ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में उसने अनुरोध किया है कि पुलिस कमिश्नर वाराणसी को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए जाएं, ताकि आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित हो सके और उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
पीड़ित का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उसने मुख्यमंत्री से अपने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। पीड़ित का मानना है कि इस मामले में निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई न केवल उसे न्याय दिलाएगी, बल्कि क्षेत्र में कानून का भय स्थापित करेगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में भी मददगार साबित होगी।
