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वाराणसी: रामनगर में गरजा नगर निगम का हंटर, सड़क पर थूकने और खुले में शौच करने वालों से वसूला गया जुर्माना

वाराणसी: रामनगर में गरजा नगर निगम का हंटर,  सड़क पर थूकने और खुले में शौच करने वालों से वसूला गया जुर्माना

नगर निगम वाराणसी ने रामनगर में स्वच्छता अभियान चलाकर 12 लोगों पर 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया और स्वच्छता का संदेश दिया।

वाराणसी/रामनगर: काशी नरेश की नगरी और गंगा के तट पर बसे ऐतिहासिक रामनगर में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब नगर निगम वाराणसी की प्रवर्तन टीम ने अचानक सड़कों पर उतरकर स्वच्छता अभियान का बिगुल फूंक दिया। सफाई एवं खाद्य निरीक्षक विवेक वोहरा के नेतृत्व में चले इस सघन चेकिंग अभियान ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब शहर की सूरत बिगाड़ने वालों की खैर नहीं है। नगर निगम की इस कार्रवाई ने न केवल नियम तोड़ने वालों को सबक सिखाया, बल्कि आम जनमानस को स्वच्छता के प्रति गंभीर होने का कड़ा संदेश भी दिया।

रामनगर किले के ऐतिहासिक महत्व और पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए नगर निगम ने यहाँ स्वच्छता के मानकों को सख्ती से लागू करने की ठानी है। इसी क्रम में शुक्रवार को चलाए गए अभियान के दौरान टीम ने रामनगर किला क्षेत्र, पड़ाव रोड और पीएन कॉलेज के आसपास के इलाकों को अपने रडार पर लिया। कार्रवाई इतनी त्वरित और सटीक थी कि नियम तोड़ने वालों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। टीम ने मौका-ए-वारदात पर ही गंदगी फैलाने वालों की फोटो खींची और तत्काल चालान काटकर रसीद उनके हाथ में थमा दी। इस दौरान कुल 12 लोगों को स्वच्छता नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पकड़ा गया, जिनसे मौके पर ही कुल 3,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया।

नगर निगम की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' में उन लोगों पर खास नजर रखी गई जो सार्वजनिक दीवारों और सड़कों को अपनी पीकदान समझते हैं। सड़क पर गुटखा खाकर थूकने वाले एक युवक को टीम ने रंगे हाथों पकड़ा और उसे 250 रुपये का दंड भरना पड़ा। वहीं, सभ्य समाज के लिए शर्मिंदगी का कारण बनने वाली खुले में लघुशंका (पेशाब) की आदत पर भी कड़ा प्रहार किया गया। प्रतिबंधित क्षेत्र में खुले में शौच करते पाए गए दो व्यक्तियों पर कार्रवाई करते हुए 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा, अपनी दुकानों का कूड़ा-कचरा सड़क पर फेंककर शहर को गंदा करने वाले 9 दुकानदारों पर भी गाज गिरी और प्रत्येक से 250-250 रुपये का चालान काटा गया।

सफाई एवं खाद्य निरीक्षक विवेक वोहरा ने इस मौके पर कड़े शब्दों में कहा कि काशी को स्वच्छ और बीमारी मुक्त बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान महज शुरुआत है। उन्होंने कहा, "गंदगी फैलाना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि अपराध है। हम बहुत जल्द शहर में 'डोर टू डोर' कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था को और सुदृढ़ करने जा रहे हैं, लेकिन नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। हर दुकानदार को अपनी दुकान के बाहर डस्टबिन रखना अनिवार्य है।"

अभियान के दौरान सफाई सुपरवाइजर संजय पाल के तेवर भी काफी सख्त नजर आए। उन्होंने अतिक्रमणकारियों को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग सरकारी जमीन या सड़क पर कब्जा जमाकर बैठे हैं, वे स्वयं अपना अतिक्रमण हटा लें। उन्होंने कहा, "रोड पर गंदगी और अतिक्रमण करने वालों की अब खैर नहीं है। अभी भी वक्त है कि लोग सुधर जाएं, अन्यथा भारी-भरकम जुर्माने के साथ-साथ कानूनी मुकदमे (Case) झेलने के लिए तैयार रहें।" उन्होंने बताया कि इस अभियान में कुल 3000 रुपये का राजस्व दंड स्वरूप प्राप्त किया गया है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य राजस्व कमाना नहीं, बल्कि लोगों में कानून का भय और स्वच्छता की आदत डालना है।

वहीं, सफाई सुपरवाइजर जय प्रकाश शास्त्री ने मामले को एक सामाजिक दृष्टिकोण देते हुए कहा कि कोई भी शहर प्रशासन के अकेले प्रयासों से 'स्मार्ट' नहीं बनता, जब तक कि उसके नागरिक स्मार्ट न बनें। उन्होंने कहा कि शहर तभी स्वच्छ और स्वस्थ होगा जब नागरिक और व्यापारी कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करेंगे। प्रशासन अब लाउडस्पीकर के माध्यम से पूरे नगर में मुनादी (अनाउंसमेंट) करवा रहा है ताकि कोई यह न कह सके कि उसे नियमों की जानकारी नहीं थी।

इस महत्वपूर्ण अभियान में सहायक सुपरवाइजर यशवंत यादव, चंदन राय, शिराज खान और अन्य नगर निगम कर्मचारियों ने मुस्तैदी से अपनी भूमिका निभाई। नगर निगम की इस कार्रवाई ने रामनगर के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के बीच एक नई चर्चा छेड़ दी है। उम्मीद है कि जुर्माने के डर से ही सही, लेकिन लोग अब सड़क पर गंदगी फैलाने से पहले सौ बार सोचेंगे। प्रशासन की यह मुहिम रंग लाती है या नहीं, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि रामनगर अब बदलाव की राह पर है।

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