वाराणसी में पाक्सो केस में दोषी को सख्त सजा, ऑपरेशन कन्विक्शन की बड़ी सफलता

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Mridul Kr Tiwari
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पुलिस की प्रभावी पैरवी से वाराणसी पाक्सो केस में आरोपी को अदालत से सजा

वाराणसी कमिश्नरेट के वरुणा जोन में पुलिस द्वारा चलाए जा रहे आपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण मामले में अदालत से सख्त सजा दिलाने में सफलता मिली है। थाना कैण्ट क्षेत्र में वर्ष 2015 में दर्ज पाक्सो एक्ट से संबंधित मामले में प्रभावी और सतत पैरवी के परिणामस्वरूप आरोपी को दोषसिद्ध करार दिया गया। यह फैसला न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में अहम है बल्कि ऐसे अपराधों के प्रति समाज में स्पष्ट संदेश भी देता है कि कानून अपना काम पूरी सख्ती से करेगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना कैण्ट कमिश्नरेट वाराणसी में मुकदमा अपराध संख्या 98/2015 धारा 354 और 354डी भारतीय दंड विधान तथा 7/8 पाक्सो एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत किया गया था। इस मामले में अभियुक्त जितेन्द्र सोनकर पुत्र केवल सोनकर निवासी वरुणा पुल के पास थाना कैण्ट वाराणसी को आरोपी बनाया गया था। विवेचना के बाद मामले की सुनवाई माननीय विशेष न्यायालय पाक्सो एक्ट अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश वाराणसी के समक्ष चली। इस दौरान प्रभारी निरीक्षक थाना कैण्ट और मॉनिटरिंग सेल वाराणसी द्वारा निरंतर और ठोस पैरवी की गई। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी पाया।

दिनांक 31 जनवरी 2026 को सुनाए गए निर्णय में अदालत ने अभियुक्त को धारा 354 भारतीय दंड विधान के अंतर्गत तीन वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इसके अतिरिक्त पाक्सो एक्ट की गंभीर धारा के अंतर्गत अभियुक्त को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। इस प्रकार कुल मिलाकर अभियुक्त पर पंद्रह हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अर्थदंड की राशि अदा नहीं की जाती है तो अभियुक्त को पैंतालीस दिवस का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आपरेशन कन्विक्शन का उद्देश्य केवल सजा दिलाना नहीं बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करना और पीड़ित पक्ष का भरोसा कायम रखना है। इस मामले में समयबद्ध और सटीक पैरवी के चलते यह संभव हो सका कि वर्षों पुराने मामले में भी न्याय सुनिश्चित किया गया। कमिश्नरेट पुलिस ने इसे अपनी कार्यशैली की सफलता बताया है और कहा है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में पूरी गंभीरता के साथ कार्रवाई की जाएगी ताकि समाज में कानून का डर और पीड़ितों में न्याय की उम्मीद बनी रहे।

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