वाराणसी कमिश्नरेट के वरुणा जोन में पुलिस ने फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कर धोखाधड़ी करने के एक गंभीर मामले में वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त वाराणसी के निर्देश पर अपराधों की रोकथाम और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। पुलिस उपायुक्त वरुणा जोन के निर्देशन और अपर पुलिस उपायुक्त के पर्यवेक्षण में सहायक पुलिस आयुक्त सारनाथ के नेतृत्व में थाना सारनाथ पुलिस टीम ने इस मामले में सफलता हासिल की है।
पुलिस के अनुसार थाना सारनाथ कमिश्नरेट वाराणसी में मुकदमा संख्या 0034 2023 धारा 419 420 467 468 471 406 352 504 506 34 और 120 बी भारतीय दंड विधान के तहत दर्ज मामले में नामजद वांछित आरोपी शिवप्रकाश सिंह उर्फ मोनू को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान शिवप्रकाश सिंह पुत्र लालजी सिंह निवासी ग्राम रमरेपुर थाना सैदपुर जनपद गाजीपुर उम्र करीब 34 वर्ष के रूप में हुई है।
पुलिस टीम ने दिनांक 29 जनवरी 2026 को समय करीब 12 बजकर 15 मिनट पर आरोपी के घर ग्राम रमरेपुर थाना सैदपुर जनपद गाजीपुर में दबिश देकर उसे नियमानुसार गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को थाना सारनाथ लाकर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मामले का विवरण देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दिनांक 29 जनवरी 2023 को वादी द्वारा थाना सारनाथ में एक लिखित प्रार्थना पत्र दिया गया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने षड्यंत्र के तहत एक फर्जी व्यक्ति को वास्तविक बताकर जमीन की रजिस्ट्री करवा दी और इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। बाद में कचहरी कार्यालय से जानकारी होने पर यह स्पष्ट हुआ कि रजिस्ट्री में प्रस्तुत व्यक्ति और कागजात पूरी तरह कूटरचित थे।
जब वादी ने अपनी धनराशि वापस मांगी तो आरोपियों ने गाली गलौज करते हुए मारपीट पर आमादा होने के साथ जान माल की धमकी दी। इस शिकायत के आधार पर थाना सारनाथ में मुकदमा संख्या 0034 2023 दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी जिसकी जांच उप निरीक्षक राहुल कुमार यादव द्वारा की जा रही थी।
पूछताछ के दौरान आरोपी शिवप्रकाश सिंह उर्फ मोनू ने स्वीकार किया कि उसने अपने एक दोस्त और उसकी पत्नी के साथ मिलकर यह योजना बनाई थी। आरोपी ने बताया कि वाराणसी में एक डमी व्यक्ति प्रस्तुत कर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई और इस धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि आपस में बांटी गई। आरोपी के अनुसार उसके हिस्से में करीब तीन लाख रुपये आए थे जो उसके बैंक खाते में जमा हुए थे।
पुलिस का कहना है कि यह मामला संगठित तरीके से की गई धोखाधड़ी और कूटरचना से जुड़ा हुआ है। अन्य संलिप्त आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है।
इस गिरफ्तारी में थाना प्रभारी पंकज कुमार त्रिपाठी उप निरीक्षक राहुल कुमार यादव उप निरीक्षक रामअजोर और कांस्टेबल अशोक यादव शामिल रहे। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े के मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे अपराधों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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