वाराणसी में जमीन-मकान रजिस्ट्री के लिए आधार और पैन अनिवार्य

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Savan Nayak
Savan Nayak is the Bureau Chief for Uttar Pradesh at News Report, a registered Hindi newspaper. He specializes in ground reporting on crime, law and order,...
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वाराणसी में संपत्ति रजिस्ट्री के नए नियम लागू, पहचान के लिए आधार और पैन जरूरी

वाराणसी में जमीन और मकान की रजिस्ट्री को लेकर बड़ा और अहम बदलाव किया गया है। अब संपत्ति की रजिस्ट्री कराते समय क्रेता और विक्रेता दोनों के लिए आधार कार्ड और पैन कार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही रजिस्ट्री में शामिल गवाहों का मोबाइल नंबर भी आधार से लिंक होना जरूरी होगा। इन शर्तों को पूरा किए बिना अब किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री संभव नहीं होगी। निबंधन विभाग ने इस नियम को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।

इस नए प्रावधान का सीधा असर उन मामलों पर पड़ेगा, जिनमें फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन बेच दी जाती थी या असली मालिक की जानकारी के बिना संपत्ति का लेनदेन कर दिया जाता था। अब आधार और पैन के माध्यम से क्रेता और विक्रेता की पहचान पूरी तरह स्पष्ट रहेगी। रजिस्ट्री दस्तावेज के साथ मूल व्यक्ति की पहचान का ठोस प्रमाण हमेशा रिकॉर्ड में उपलब्ध रहेगा, जिससे किसी भी प्रकार के फ्रॉड की जांच आसान हो जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय केवल आम नागरिकों की संपत्ति को सुरक्षित करने के उद्देश्य से ही नहीं लिया गया है, बल्कि इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय अपराधों पर नियंत्रण की मंशा भी है। विशेष रूप से भारत नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में बेनामी संपत्ति के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही थी। कई मामलों में जमीन का असली मालिक कोई और होता था, लेकिन स्थानीय लोगों को आगे कर कागजातों में हेरफेर कर संपत्ति का क्रय विक्रय किया जाता था। इससे न केवल आम लोग ठगे जा रहे थे, बल्कि काले धन की आवाजाही भी बढ़ रही थी।

पैन कार्ड को अनिवार्य करने का निर्णय गृह विभाग के निर्देशों के तहत लिया गया है। ब्लैक मनी को सफेद करने के लिए अक्सर दूसरे के नाम पर जमीन खरीदने की प्रवृत्ति सामने आती रही है। अब विक्रेता को अपनी पहचान सार्वजनिक करनी होगी और पैन के माध्यम से लेनदेन की जानकारी आयकर प्रणाली से भी जुड़ जाएगी। इससे काले धन की एंट्री पर प्रभावी रोक लगेगी।

इस संबंध में महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने प्रदेश के सभी उप निबंधक कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि संपत्ति की रजिस्ट्री में आधार और पैन कार्ड की जांच अनिवार्य रूप से की जाए। साथ ही गवाहों के मोबाइल नंबर आधार से लिंक होने की पुष्टि भी की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर फर्जी व्यक्ति को गवाह बनाकर रजिस्ट्री न कराई जा सके।

वर्तमान स्थिति यह है कि न्यायालयों में जमीन और मकान से जुड़े विवादों की संख्या सबसे अधिक है। संपूर्ण समाधान दिवस और जनसुनवाई में अक्सर शिकायतें आती हैं कि किसी ने बिना जानकारी के मेरी जमीन की रजिस्ट्री करा ली। कई बार क्रेता भी ऐसे मामलों में फंस जाते हैं, जहां दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर असली काश्तकार का नाम हटाकर किसी और को मालिक बना दिया जाता है। नए नियम लागू होने के बाद ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगेगी।

निबंधन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और संपत्ति से जुड़े मुकदमों में कमी होगी। आम नागरिकों के लिए यह नियम राहत भरा है, क्योंकि अब उनकी जमीन और जायदाद पहले से ज्यादा सुरक्षित होगी। यदि कोई व्यक्ति फर्जी तरीके से संपत्ति बेचने या बेचवाने की कोशिश करता है, तो उसकी पहचान करना आसान होगा और सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।

कुल मिलाकर, आधार और पैन की अनिवार्यता से न केवल संपत्ति लेनदेन सुरक्षित होगा, बल्कि बेनामी संपत्तियों, काले धन और दस्तावेजी फर्जीवाड़े पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा। यह कदम आम जनता के हित के साथ साथ देश की आर्थिक और आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।