वाराणसी में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति चिंताजनक हो चली है। बीते 11 महीनों में जिले में 254 लोगों की जान सड़क हादसों में चली गई है। इनमें सबसे अधिक हादसे प्रयागराज वाराणसी हाईवे पर हुए जहां 97 लोगों ने दर्दनाक तरीके से दम तोड़ दिया। तेज रफ्तार, सड़क किनारे खड़े भारी वाहन और जगह जगह बनाए गए असुरक्षित कट मुख्य कारण माने जा रहे हैं। नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और रिंग रोड से जुड़ी सड़कों पर लगातार हो रही दुर्घटनाएं इस बात की गवाही देती हैं कि प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे सड़क सुरक्षा माह और सड़क सुरक्षा सप्ताह जैसे अभियानों का असर जमीन पर बहुत सीमित दिख रहा है। सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन हादसों का आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि अब तक परिस्थितियों में आवश्यक सुधार नहीं हो पाया है।
पिछले कुछ सालों में वाराणसी कई नेशनल और स्टेट हाईवे से जुड़ गया है। सड़कों के चौड़ी होने के साथ ही वाहनों की रफ्तार भी अनियंत्रित होती चली गई है। दुर्घटनाओं के लगातार बढ़ते मामलों के बावजूद केवल आठ स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि सही सर्वे और जांच के बाद जिले में कम से कम 50 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जा सकते हैं। यदि इन स्थानों पर इंजीनियरिंग सुधार किए जाएं तो सड़क हादसों को काफी हद तक कम किया जा सकता है और कई जानें बचाई जा सकती हैं। इस वर्ष सर्वाधिक दुर्घटनाएं वाराणसी प्रयागराज नेशनल हाईवे पर हुईं, जिनमें से कई बड़ी दुर्घटनाएं मिर्जामुराद क्षेत्र में दर्ज की गईं।
मिर्जामुराद के बिहड़ा, ठठरा, चित्रसेनपुर, रूपापुर, डंगहरिया, भीखीपुर, खजुरी, रखौना, मेंहदीगंज और भिखारीपुर में लगभग हर दूसरे दिन कोई न कोई गंभीर हादसा सामने आ रहा है। इस मार्ग पर दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजह हाईवे के किनारे खड़े ट्रक माने जाते हैं। तेज रफ्तार से चल रही कार या बाइक जरा सी चूक में इन ट्रकों से टकरा जाती है और मौके पर ही मौत हो जाती है। मोहन सराय क्षेत्र में सर्विस लेन पर गलत दिशा से आने वाले वाहन लगातार हादसों का कारण बन रहे हैं। कपसेठी थाना क्षेत्र के शिवदासपुर गांव के सामने भदोही वाराणसी रोड से ममहर जाने वाले रास्ते पर भी 11 महीनों में सात लोगों की मौत हो चुकी है। चौबेपुर थाना क्षेत्र के ढाखा ग्राम सभा के पास नेशनल हाईवे 31 पर कैथी और चौबेपुर के अंडरपास तथा पब्लिक फुटओवर ब्रिज न होने से भी हादसों की संख्या बढ़ रही है। शिवपुर तरना फ्लाईओवर से नीचे उतरते ही सर्विस रोड की अव्यवस्थित स्थिति भी कई हादसों की वजह बन रही है।
मार्च में सड़क दुर्घटना वाले स्थानों पर पुलिस, आरटीओ, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई की संयुक्त जांच रिपोर्ट में ब्लैक स्पॉट पर स्पीड ब्रेकर, साइनेज, रिफ्लेक्टर और गोलचक्कर जैसे सुधारात्मक कदम उठाने की सिफारिश की गई थी। इसके बावजूद अब तक कई स्थानों पर स्पीड ब्रेकर तक नहीं लगाए गए हैं और न ही अन्य सुधार पूरे किए गए हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ अरबाब अहमद के अनुसार अधिकांश दुर्घटनाएं ब्लैक स्पॉट पर होती हैं। किसी स्थान को ब्लैक स्पॉट घोषित करने के लिए उस जगह पर तीन वर्षों में कम से कम पांच गंभीर दुर्घटनाएं होना आवश्यक है। इसके बावजूद वाराणसी में घटनाओं की संख्या बढ़ने के बाद भी ब्लैक स्पॉट की संख्या कम है और कई अत्यधिक संवेदनशील स्थान सूची से बाहर हैं। रोहनिया के लठिया चौराहे पर एक वर्ष में दो बड़ी दुर्घटनाएं हुईं और इससे पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, फिर भी इसे ब्लैक स्पॉट घोषित नहीं किया गया है। इसके अलावा हरहुआ बाजार, गिलट बाजार से तरना, विश्वसुंदरी पुल से टेंगरा मोड़, मोहनसराय बाइपास, अमरा अखरी बाइपास, धमरी पुल, चिलबिला और सूजाबाद से रामनगर तक कई स्थान ऐसे हैं जिन्हें आधिकारिक रूप से ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया है।
ओवरटेक के दौरान भी कई दर्दनाक हादसे हुए जिनमें एक ही परिवार या एक ही समूह के कई लोग एक साथ मौत का शिकार बने। 25 जनवरी को खजुरी चट्टी पर हाईवे के किनारे खड़े ट्रेलर में ओवरटेक करते समय कार के घुस जाने से जम्मू कश्मीर में तैनात फौजी शिवजी सिंह, उनकी बेटी सोनम सिंह, कार चालक राजू सिंह और चालक की पत्नी अलका सिंह की मौत हो गई थी। फौजी की पत्नी नीरा इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई थीं। 21 फरवरी को रूपापुर के पास तीर्थयात्रियों से भरी क्रूजर हाईवे पर खड़े ट्रक में टकरा गई जिसमें कर्नाटक के बिदर जिले के छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। 14 जून को कछवां रोड चौराहे के पास तेज रफ्तार कार ट्रक की टक्कर के बाद अनियंत्रित होकर ओवरब्रिज डिवाइडर से टकरा गई, जिसमें प्रयागराज के तीन युवकों की जान चली गई।
इन दर्दनाक घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सड़क सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयास कितने प्रभावी हैं। जब तक हाईवे पर इंजीनियरिंग सुधार, सख्त निगरानी और लोगों के बीच सतर्कता की गंभीर संस्कृति विकसित नहीं होती, तब तक वाराणसी में सड़क हादसों को रोकना चुनौतीपूर्ण ही रहेगा।
वाराणसी में सड़क हादसों में 254 मौतें, प्रयागराज-वाराणसी हाईवे सबसे खतरनाक

वाराणसी में 11 महीने में सड़क हादसों में 254 लोगों की मौत हुई है, प्रयागराज-वाराणसी हाईवे पर सर्वाधिक 97 जानें गईं।
Category: uttar pradesh varanasi road safety
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