काशी में मंगलवार को यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। कृष्णानंद पांडेय के नेतृत्व में सैकड़ों छात्रों ने दैत्रा वीर मंदिर सर्किट हाउस के सामने से कलेक्ट्रेट गेट तक जुलूस निकालकर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नियमों को अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि ये बदलाव शिक्षा के क्षेत्र में असमानता को बढ़ावा दे रहे हैं और सवर्ण समाज के छात्रों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं। जुलूस के दौरान कचहरी मुख्यालय के सामने सरकार विरोधी नारे भी लगाए गए और छात्रों ने अपनी मांगों को जोरदार तरीके से रखा।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियम न केवल उनके शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि समाज में विभाजन की स्थिति भी पैदा कर रहे हैं। सवर्ण समाज के छात्रों ने एकजुट होकर कहा कि शिक्षा में समान अवसर हर वर्ग का अधिकार है और किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता। धरना स्थल पर मौजूद छात्रों ने बैनर और पोस्टर के माध्यम से अपने विरोध के कारणों को स्पष्ट किया और सरकार से नियमों में संशोधन की मांग की।
कृष्णानंद पांडेय ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि यूजीसी के नए नियम सवर्ण समाज के छात्रों के लिए अवसरों को सीमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा में समानता लोकतंत्र की बुनियाद है और यदि किसी वर्ग के साथ अन्याय होता है तो उसका विरोध किया जाना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सवर्ण समाज के छात्र अपने अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन जारी रखेंगे।
धरना प्रदर्शन में शामिल अन्य छात्र नेताओं ने भी सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले और यूजीसी के नियमों पर पुनर्विचार करे। छात्रों का कहना था कि यदि समय रहते इन नियमों में संशोधन नहीं किया गया तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए और सभी ने एक स्वर में समान अवसर और न्याय की मांग की।
इसी बीच दोपहर के समय यूजीसी के विरोध में कचहरी मुख्यालय के मुख्य गेट पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अधिकारियों की गाड़ियों को रोक दिया जिससे कुछ समय के लिए मार्ग अवरुद्ध हो गया। स्थिति को संभालने के लिए एसीपी कैंट और इंस्पेक्टर कैंट मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों तथा अधिवक्ताओं को समझाने का प्रयास करते नजर आए। काफी मशक्कत के बाद स्थिति सामान्य हुई और यातायात बहाल किया गया।
वाराणसी में हुआ यह धरना प्रदर्शन यूजीसी के नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज की एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है। छात्रों ने साफ शब्दों में कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे और किसी भी प्रकार के अन्याय के सामने झुकेंगे नहीं। इस आंदोलन ने शिक्षा के क्षेत्र में समानता और निष्पक्षता की मांग को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।
