वाराणसी में 103वां संकट मोचन संगीत समारोह 6 अप्रैल से, 6 दिन में 135 कलाकार देंगे 45 प्रस्तुतियां
वाराणसी। संगीत साधकों का तीर्थ कहे जाने वाला प्रतिष्ठित संकट मोचन संगीत समारोह इस वर्ष 103वें संस्करण के साथ 6 अप्रैल 2026 से आरंभ होगा। यह छह दिवसीय आयोजन 11 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें देशभर के 135 से अधिक कलाकार 45 से ज्यादा प्रस्तुतियां देंगे।
हर दिन शाम से सुबह तक गूंजेगा संगीत
संकट मोचन मंदिर में आयोजित होने वाला यह समारोह प्रतिदिन सायंकालीन आरती के बाद शाम 7:30 बजे शुरू होगा और पूरी रात चलता हुआ प्रातःकालीन आरती तक या उससे आगे भी जारी रहेगा।
इस समारोह की खास बात यह है कि इसमें सभी घरानों, धर्मों और परंपराओं के कलाकार भगवान हनुमान के दरबार में अपनी कला अर्पित करते हैं, जिससे यह आयोजन सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन जाता है।
11 पद्म सम्मानित कलाकारों की भागीदारी
इस वर्ष समारोह में 11 पद्म सम्मानित कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही 21 नवोदित कलाकारों को भी मंच दिया जा रहा है, जिससे युवा प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिलेगा।
मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि यह आयोजन न केवल परंपरा को जीवित रखता है, बल्कि नई पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने का भी माध्यम है।
पहले दिन होगा भव्य शुभारंभ
6 अप्रैल को समारोह का उद्घाटन रूपवाणी संस्था की नृत्य नाटिका ‘चित्रकूट’ से होगा, जिसका निर्देशन प्रसिद्ध रंगकर्मी और साहित्यकार व्योमेश शुक्ल करेंगे।
इसके बाद पंडित राहुल शर्मा द्वारा संतूर वादन और पद्मश्री विदुषी मालिनी अवस्थी का गायन होगा, जो पहले दिन का मुख्य आकर्षण रहेगा।
दूसरे और तीसरे दिन दिग्गजों की प्रस्तुतियां
दूसरे दिन पद्मश्री पंडित विश्व मोहन भट्ट की मोहन वीणा, पंडित सुनील भट्ट की सात्विक वीणा, उस्ताद गुलाम अब्बास खान का गायन और उस्ताद अकरम खान का तबला वादन दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगा।
तीसरे दिन पंडित उल्हास कशालकर, जसविंदर नरूला, देवाशीष भट्टाचार्य, आलोक लहरी, देव ज्योति बोस और यू. राजेश जैसे कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। साथ ही ओडिसी नृत्य की भी विशेष प्रस्तुति होगी।
चौथे दिन भजन और शास्त्रीय संगीत का संगम
चौथे दिन पद्मश्री पंडित अनूप जलोटा का भजन गायन प्रमुख आकर्षण रहेगा। इसके अलावा पंडित अजय पोहनकर, पंडित सतीश व्यास और पंडित जयतीर्थ मेउंडी की प्रस्तुतियां भी होंगी।
पांचवें दिन नृत्य और वाद्य संगीत का संगम
पंचम दिवस पर पंडित राम मोहन महाराज का कथक नृत्य, रोनू मजूमदार की बांसुरी, कंकणा बनर्जी का गायन और उस्ताद मसकूर अली खान की प्रस्तुति खास आकर्षण होगी।
इसके साथ ही युवा कलाकारों की प्रस्तुतियां भी दर्शकों को नई ऊर्जा और विविधता का अनुभव कराएंगी।
अंतिम दिन होगा भव्य समापन
11 अप्रैल को समारोह के अंतिम दिन ओडिसी नृत्य के साथ रतिकांत महापात्र और सुजाता महापात्र की प्रस्तुति होगी। इसके अलावा कलापिनी कोमकली, अभय रुस्तम सपोरी और उस्ताद शाकिर खान जैसे कलाकार मंच सजाएंगे।
समारोह का समापन पद्मभूषण पंडित साजन मिश्रा और उनके पुत्र सारांश मिश्रा के युगल गायन से होगा, जो इस आयोजन को एक यादगार अंत देगा।
सांस्कृतिक विरासत का जीवंत मंच
संकट मोचन संगीत समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति की जीवंत परंपरा है। यह मंच जहां दिग्गज कलाकारों को सम्मान देता है, वहीं नई प्रतिभाओं को पहचान भी दिलाता है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी यह आयोजन संगीत प्रेमियों के लिए एक अद्भुत अनुभव साबित होने वाला है, जहां भक्ति, कला और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
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