काशी विश्वनाथ धाम के बाहर दलाली पर बड़ा शिकंजा वीआईपी और स्पर्श दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं को ठगने वाले 25 आरोपी गिरफ्तार
वाराणसी: श्री काशी विश्वनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को वीआईपी दर्शन और स्पर्श दर्शन के नाम पर गुमराह कर अवैध वसूली करने वाले फर्जी दलालों और कथित पंडा पुजारियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद चलाए गए विशेष अभियान में पुलिस ने कुल 25 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें थाना चौक पुलिस ने 22 और दशाश्वमेध पुलिस ने 3 आरोपियों को दबोचा है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर श्रद्धालुओं को झांसा देकर उनसे पैसे ऐंठने और दर्शन के नाम पर धोखाधड़ी करने के आरोप हैं।
यह कार्रवाई केवल एक सामान्य गिरफ्तारी अभियान नहीं मानी जा रही बल्कि इसे मंदिर परिसर और उसके आसपास सक्रिय उस अवैध नेटवर्क पर बड़ी चोट माना जा रहा है जो लंबे समय से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाकर कमाई कर रहा था। पुलिस के अनुसार पकड़े गए आरोपी मंदिर परिसर और घाट क्षेत्र के आसपास अलग अलग तरीके से सक्रिय रहते थे और बाहरी श्रद्धालुओं को अपना निशाना बनाते थे।
कभी पुजारी तो कभी श्रद्धालु बनकर लोगों को जाल में फंसाते थे आरोपी
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए कई आरोपी विप्र वेशभूषा में मंदिर के आसपास घूमते थे जबकि कुछ सामान्य श्रद्धालुओं की तरह लोगों के बीच रहते थे। उनका मुख्य उद्देश्य बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की पहचान करना और फिर उनसे बातचीत शुरू कर विश्वास जीतना होता था। इसके बाद वे खुद को मंदिर व्यवस्था से जुड़ा व्यक्ति या प्रभावशाली संपर्क वाला बताकर लोगों को विशेष दर्शन कराने का भरोसा देते थे।
पुलिस के अनुसार आरोपियों का दावा होता था कि सामान्य लाइन में घंटों इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे सीधे स्पर्श दर्शन या सुगम दर्शन करवा देंगे। इसके बदले श्रद्धालुओं से पांच सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक की रकम वसूली जाती थी। कई मामलों में श्रद्धालुओं को भ्रमित कर उससे भी अधिक पैसे लेने की शिकायतें सामने आई थीं।
पुलिस को देखते ही भागने लगे आरोपी
अभियान के दौरान पुलिस टीम ने मंदिर परिसर और उससे जुड़े प्रमुख मार्गों के साथ घाट क्षेत्र में निगरानी शुरू की। जैसे ही संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों को पुलिस की मौजूदगी का आभास हुआ तो कई आरोपी मौके से भागने लगे। पुलिसकर्मियों ने पीछा कर उन्हें पकड़ लिया। सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर थाने लाया गया और पूछताछ शुरू की गई।
पूछताछ के दौरान कई आरोपियों ने यह स्वीकार किया कि वे दर्शन कराने के नाम पर श्रद्धालुओं से पैसे लेते थे और उन्हें गुमराह कर आर्थिक लाभ कमाते थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और इससे जुड़े अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।
जांच में मिलीभगत के संकेत भी सामने आए
पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। पूछताछ के दौरान दबी जुबान में मंदिर परिसर से जुड़े कुछ लोगों की संभावित मिलीभगत की बात भी चर्चा में आई है। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है लेकिन जांच एजेंसियां इस दिशा में भी तथ्यों को जुटाने में लगी हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की संलिप्तता सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाई
काशी विश्वनाथ धाम देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल है जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेष अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में दर्शन व्यवस्था के नाम पर सक्रिय फर्जी नेटवर्क लगातार पुलिस के निशाने पर रहा है। इससे पहले भी पुलिस ने एक साथ 21 कथित फर्जी एजेंटों और दलालों को गिरफ्तार किया था। कुंभ महाशिवरात्रि सावन और अन्य धार्मिक अवसरों पर भी कई बार ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान चलाया गया है।
सिविल ड्रेस में उतारी गई पुलिस टीम
एसीपी अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि श्रद्धालुओं से दर्शन के नाम पर पैसे मांगे जा रहे हैं और उनके साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष अभियान तैयार किया गया। अभियान में महिला और पुरुष कांस्टेबलों को सिविल ड्रेस में तैनात किया गया ताकि आरोपी आसानी से पहचाने जा सकें।
एसीपी के अनुसार अभियान के दौरान थाना चौक क्षेत्र से 22 और दशाश्वमेध थाना क्षेत्र से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि वीआईपी और सुगम दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं से पैसे ठगने वालों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
श्रद्धालुओं से पुलिस की अपील
पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि दर्शन कराने के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति के झांसे में न आएं। किसी भी प्रकार की धन उगाही या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें। प्रशासन का कहना है कि मंदिर में दर्शन के लिए निर्धारित और अधिकृत व्यवस्था मौजूद है और किसी निजी व्यक्ति के माध्यम से विशेष सुविधा लेने का प्रयास लोगों को ठगी का शिकार बना सकता है।
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