वाराणसी की चर्चित बेनियाबाग बकरा मंडी पर अचानक ताला लगने से मचा हड़कंप
वाराणसी: बकरीद से पहले वर्षों से लगने वाली चर्चित बेनियाबाग अस्थायी बकरा मंडी को सोमवार को अचानक बंद किए जाने के बाद व्यापारियों के बीच अफरा तफरी का माहौल बन गया। बेनियाबाग पार्किंग क्षेत्र के पास स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत पिछले कई वर्षों से संचालित हो रही यह अस्थायी मंडी पूर्वांचल की बड़ी पशु मंडियों में गिनी जाती रही है। बकरीद के नजदीक आते ही यहां प्रदेश के अलग अलग जिलों से बड़ी संख्या में व्यापारी अपने पशु लेकर पहुंचते हैं। ऐसे समय में नगर निगम की अचानक कार्रवाई ने व्यापारियों के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
जानकारी के अनुसार सोमवार को मंडी में रोजाना की तरह व्यापारिक गतिविधियां चल रही थीं और व्यापारी अपने बकरों की बिक्री में जुटे हुए थे। इसी दौरान नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और मंडी को तत्काल खाली करने का निर्देश दिया गया। बताया जा रहा है कि व्यापारियों को केवल एक घंटे का समय दिया गया। अचानक मिली इस सूचना के बाद वहां मौजूद सैकड़ों व्यापारियों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में लोग समझ नहीं पा रहे थे कि इतने कम समय में अपने पशुओं और सामान को कहां ले जाया जाए।
पूर्वांचल सहित कई जिलों से पहुंचे थे व्यापारी
मंडी में मौजूद व्यापारियों के अनुसार उस समय करीब ढाई सौ व्यापारी अपने पशुओं के साथ मौजूद थे। इनमें सहारनपुर मुजफ्फरनगर एटा इटावा मैनपुरी सीतापुर बाराबंकी सुल्तानपुर प्रयागराज कौशांबी भदोही मिर्जापुर सोनभद्र चंदौली मऊ गाजीपुर आजमगढ़ जौनपुर देवरिया और गोरखपुर समेत कई जिलों से आए लोग शामिल थे। कई व्यापारी ऐसे थे जो अपने साथ पचास से लेकर सौ तक बकरे लेकर पहुंचे थे। व्यापारियों का कहना है कि वे लंबी दूरी तय करके यहां पहुंचे थे और बकरीद से पहले अच्छी बिक्री की उम्मीद लगाए बैठे थे।
एक घंटे की मोहलत ने बढ़ाई व्यापारियों की चिंता
व्यापारियों का कहना है कि अचानक लिए गए इस फैसले ने उनके सामने गंभीर समस्या खड़ी कर दी है। उनका कहना है कि लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये का पशुधन मंडी में मौजूद था। इतनी बड़ी संख्या में जानवरों को कम समय में सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना आसान नहीं है। व्यापारियों ने प्रशासन से कम से कम दो दिन का अतिरिक्त समय देने की मांग की है। उनका कहना है कि भीषण गर्मी के मौसम में पशुओं की देखभाल और उनके लिए सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण कार्य है।
कई व्यापारियों ने भावुक होकर कहा कि वे दूर दराज क्षेत्रों से भारी निवेश करके यहां पहुंचे थे। कुछ लोगों ने बताया कि वे उधार लेकर या कर्ज के सहारे पशु खरीदकर कारोबार करने आए हैं। ऐसे में अचानक मंडी बंद होने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। व्यापारियों का कहना है कि यदि उन्हें थोड़ा समय मिल जाए तो वे व्यवस्थित तरीके से यहां से अपने पशु लेकर वापस लौट सकते हैं।
ठेका धारकों ने भी उठाए सवाल
मंडी के ठेका धारकों ने भी नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। ठेका धारक बाबू माडल ने बताया कि उन्होंने स्मार्ट सिटी के माध्यम से लगभग बाईस से चौबीस लाख रुपये में मंडी का ठेका लिया था। उनके अनुसार यह ठेका दस दिन तक संचालन के लिए दिया गया था। उनका कहना है कि उन्हें किसी प्रकार की पूर्व सूचना नहीं दी गई और अचानक टीम पहुंचकर मंडी खाली कराने लगी। उन्होंने कहा कि यदि पहले से सूचना दी जाती तो व्यापारी और ठेका धारक वैकल्पिक व्यवस्था कर सकते थे।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
सोमवार को कार्रवाई के दौरान एसीपी दशाश्वमेध के साथ भारी पुलिस बल और प्रशासनिक टीम भी मौके पर मौजूद रही। पुलिस की निगरानी में मंडी को खाली कराया गया और बाद में परिसर में ताला लगा दिया गया। कार्रवाई के दौरान व्यापारियों के बीच नाराजगी और असमंजस की स्थिति देखने को मिली। कई व्यापारी प्रशासनिक अधिकारियों से कारण जानने की कोशिश करते रहे लेकिन उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।
आधिकारिक बयान का इंतजार
फिलहाल नगर निगम की ओर से मंडी बंद करने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में व्यापारियों और ठेका धारकों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। बकरीद से पहले इस कार्रवाई ने न केवल व्यापारियों की चिंता बढ़ाई है बल्कि स्थानीय स्तर पर भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है और व्यापारियों की मांगों पर कोई निर्णय लिया जाता है या नहीं।
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