वाराणसी बोर्ड कार्यालय में जन्मतिथि संशोधन पर उठे गंभीर सवाल, 40 हजार रुपये घूस लेने के आरोप के बाद छह कर्मचारियों से मांगा गया जवाब
हाईस्कूल प्रमाणपत्र संशोधन प्रक्रिया में अनियमितताओं का मामला आया सामने, जांच में फाइलों के स्तर पर कई बिंदुओं पर मिली प्रथम दृष्टया गड़बड़ियां
वाराणसी: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी में हाईस्कूल प्रमाणपत्र में जन्मतिथि संशोधन की प्रक्रिया को लेकर एक गंभीर मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। गोरखपुर निवासी एक छात्र की शिकायत के आधार पर शुरू हुई जांच में प्रमाणपत्र संशोधन प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामले में शिकायतकर्ता ने जन्मतिथि संशोधन के एवज में 40 हजार रुपये घूस लिए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें प्रथम दृष्टया कई बिंदुओं पर प्रक्रिया संबंधी गड़बड़ियां सामने आने के बाद छह कर्मचारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।
मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और क्षेत्रीय कार्यालय में पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। दस्तावेजों की जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने जन्मतिथि संशोधन प्रक्रिया की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गोरखपुर के छात्र की शिकायत से खुला मामला
प्रभारी अपर सचिव एवं संयुक्त शिक्षा निदेशक वाराणसी दिनेश सिंह के अनुसार यह मामला गोरखपुर के कूड़ाघाट निवासी अंकित कुमार से जुड़ा है, जो नीना थापा इंटर कॉलेज का छात्र रहा है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2014 के हाईस्कूल प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि में संशोधन के लिए नियमों के विपरीत प्रक्रिया अपनाई गई। शिकायतकर्ता के अनुसार प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि 29 फरवरी 1998 के स्थान पर 28 फरवरी 1998 करने का अनुरोध किया गया था। आरोप है कि संशोधित प्रमाणपत्र बाद में संतोष नामक व्यक्ति को उपलब्ध करा दिया गया।
नौ साल बाद भेजा गया था संशोधन आवेदन
जांच के दौरान सामने आया कि छात्र ने हाईस्कूल परीक्षा पास करने के लगभग नौ वर्ष बाद नवंबर 2023 में जन्मतिथि संशोधन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। विभागीय जानकारी के अनुसार इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के प्रावधानों के अनुसार इतने लंबे समय के बाद इस प्रकार का संशोधन सामान्य प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं माना जाता। इसके बावजूद दिसंबर 2023 में स्कूल से संबंधित दस्तावेज और स्थानांतरण प्रमाणपत्र कार्यालय में प्राप्त हुए और फाइल आगे बढ़ती चली गई।
जांच में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार फाइल पर विभिन्न स्तरों पर टिप्पणियां दर्ज की गईं। शुरुआती स्तर पर इसे अस्वाभाविक त्रुटि मानते हुए संशोधन को उचित बताया गया। इसके बाद प्रशासनिक और सहायक सचिव स्तर पर भी अनुमोदन दर्ज किए गए। हालांकि जांच में यह भी सामने आया कि कई आवश्यक अभिलेख फाइल में उपलब्ध नहीं थे और कुछ स्थानों पर बिना समुचित परीक्षण के हस्ताक्षर किए गए।
ओवरराइटिंग कर आदेश में बदलाव का भी आरोप
मामले में एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। प्रभारी सचिव की ओर से जारी स्पष्टीकरण पत्र में उल्लेख किया गया कि फरवरी 2026 में ओवरराइटिंग के माध्यम से पुराने आदेशों में बदलाव किया गया और जन्मतिथि संशोधन से जुड़ा आदेश जारी कर दिया गया। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि जिस टीओआरसी पत्र के आधार पर कार्रवाई दर्शाई गई, वह संबंधित अनुभाग में उपलब्ध नहीं था। इससे फाइल की प्रक्रिया और दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
छह कर्मचारियों से मांगा गया स्पष्टीकरण
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप सचिव साहब सिंह यादव सहित सहायक सचिव, प्रशासनिक अधिकारी, प्रधान सहायक और वरिष्ठ सहायक समेत कुल छह कर्मचारियों से लिखित जवाब मांगा गया है। विभागीय पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर यदि जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो यह माना जाएगा कि संबंधित कर्मचारियों के पास अपने बचाव में कोई पक्ष नहीं है। ऐसी स्थिति में उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल पूरे मामले की विभागीय जांच जारी है और अधिकारी दस्तावेजों तथा प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। मामले में लगाए गए आरोप शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर सामने आए हैं। विस्तृत जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। शिक्षा विभाग की नजर अब इस मामले की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
साभार: विकास श्रीवास्तव
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